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चीर बंधन की परंपरा के साथ आज से होगी होली की शुरुवात, जानें तिथि मूहर्त

हिंदू धर्म में होली का विशेष महत्व है। इसे देशभर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।  लेकिन कुमाऊं में होली मनाने की अनोखी परंपरा है । यहां होली से पहले चीर बाधने की परंपरा है।  इसी दिन सभी लोग एकत्रित होते हैं और चीर को एक लकड़ी में बाधा जाता हैं। और फिर सभी लोग केल बाधी चीर से होली की शुरुवात करते हैं । हालाकि होली  बैठक की शुरुवात पहले से ही कर दी जाती है।  लेकिन ये विशेष गीत चीर बाधने के बाद ही गाया जाता है। 

ये रहेगा मुहर्त

आज 2 मार्च को चीर बन्धन होगा, रंग पड़ने का प्रातः 8 से दोपहर 2 बजे तक का मुहूर्त है।  3 मार्च को आमलकी एकादशी व्रत रखा जाएगा ।

एकादशी पर खड़ी होली के पहने दिन चीर बांधने का अपना ही महत्व

मंदिरों में होली से पूर्व एकादशी पर खड़ी होली के पहने दिन चीर बांधने का अपना ही महत्व है। इस दिन लोग बांस के लंबे डंडे में नए कपड़ों की कतरन को बांधकर मंदिर में स्थापित करते हैं। कहीं कहीं तो लोगों द्वारा अपने चीर वृक्ष भी स्थापित किए जातें हैं और उसमे चीर बाधी जाती है। इसके पश्चात फिर चीर के चारों ओर लोग खड़ी होली गायन करते हैं और घर-घर जाकर खड़ी होली गाते हैं। होलिका दहन के दिन इस चीर को होलिका दहन वाले स्थान पर लाते हैं और बांस में बंधे कपड़ों के कतरन को प्रसाद के रूप में बांटते हैं। जिसे लोग अपने घरों के मुख्य द्वार पर बांधते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में बुरी शक्तियों का प्रवेश नहीं होता ।

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