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अल्मोड़ा में यादगार रहा ‘जात्रा द कसार फेस्टिवल’, संस्कृति और रोमांच का दिखा अद्भुत संगम

अल्मोड़ा: सांस्कृतिक विरासत और साहसिक खेलों का अनूठा संगम ‘जात्रा द कसार फेस्टिवल’ रविवार को रंगारंग कार्यक्रमों के साथ संपन्न हो गया है।

महोत्सव का आयोजन

जिसमें पांच दिनों तक चले इस महोत्सव ने स्थानीय संस्कृति को वैश्विक मंच देने के साथ ही लोगों को रोमांचित किया। फेस्टिवल के दौरान जहां एक ओर आसमान में पैराग्लाइडर्स ने अपनी उड़ान से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं दूसरी ओर धरती पर कुमाउनी संस्कृति की छटा बिखरी रही। समापन समारोह में रस्साकस्सी प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण रही, जिसमें महिलाओं और पुरुषों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में टीम देवस्थली द्वारा प्रस्तुत ‘मुखौटा नृत्य’ और सुंदर बैंड के कुमाउनी लोकगीतों पर दर्शक झूमने को मजबूर हो गए। इसके साथ ही कोक स्टूडियो की कलाकार कमला देवी की प्रस्तुति ने समां बांध दिया। महोत्सव के दौरान विभिन्न विषयों पर ‘पैनल डिस्कशन’ आयोजित किए गए। इसमें जौनसारी संस्कृति, लोक साहित्य, साहित्य में महिलाओं की भूमिका और हिमालय के भविष्य में युवाओं की भागीदारी जैसे गंभीर विषयों पर विशेषज्ञों ने मंथन किया।


​खेल और प्रतियोगिताओं में दिखा युवाओं का उत्साह व जोश

​महोत्सव के दौरान कला, चित्रकला, डांस और ओपन माइक जैसी रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। साहसिक खेलों में 21, 10 और 5 किलोमीटर की मैराथन हुई, जिसमें आठ राज्यों के 200 से अधिक धावकों ने दमखम दिखाया। इसके अलावा 30 किलोमीटर की दुर्गम साइकिल दौड़ भी आकर्षण का केंद्र रही। वहीं आयोजक विभु कृष्णा ने बताया कि यह फेस्टिवल अंतरराष्ट्रीय स्तर का रहा, जिसमें स्कॉटलैंड, फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया समेत पांच यूरोपीय देशों के प्रतिभागियों ने भी शिरकत की। कार्यक्रम में स्थानीय उत्पादों के स्टॉल भी लगाए गए, जिन्होंने लोगों का ध्यान आकर्षित किया।


​रहें उपस्थित

इस अवसर पर स्थानीय विधायक मनोज तिवारी, दर्जा राज्यमंत्री गंगा बिष्ट सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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