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16 जून: अंतरिक्ष में ‘नारी शक्ति’ की पहली गूंज, मिल श्रमिक वैलेनटीना तेरेशकोवा की वो उड़ान जिसने रचा इतिहास, बनी अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली विश्व की पहली महिला

इतिहास में 16 जून की तारीख एक बेहद खास और ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दर्ज है। जब इसी तारीख को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिखा गया था। जब रूस की 26 वर्षीय जांबाज महिला लेफ्टिनेंट वैलेनटीना तेरेशकोवा ने अंतरिक्ष की अथाह गहराइयों की ओर कदम बढ़ाया।

रचा इतिहास

साथ ही वह अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली विश्व की पहली महिला और पहली नागरिक बनी थीं। 16 जून 1963 को रूस की राजधानी मॉस्को से लेफ्टिनेंट वैलेनटीना तेरेशकोवा ने अपने अंतरिक्ष यान ‘वोस्तोक 6’ (Vostok 6) के जरिए अंतरिक्ष के लिए सफर शुरू किया था। दुनिया में किसी भी महिला द्वारा तय किया गया यह पहला अंतरिक्ष मिशन था, जिसने भविष्य की महिला अंतरिक्ष यात्रियों के लिए रास्ते खोल दिए।


​मिशन से जुड़ी मुख्य बातें

• ​उड़ान की अवधि: वैलेनटीना ने अंतरिक्ष में लगभग 3 दिन (करीब 71 घंटे) का समय बिताया।
• ​पृथ्वी के चक्कर: इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान उनके अंतरिक्ष यान ने पृथ्वी के कुल 48 चक्कर लगाए थे।
• ​कपड़ा मिल से अंतरिक्ष तक का सफर: अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले वैलेनटीना एक कपड़ा मिल में श्रमिक (वर्कर) के रूप में काम करती थीं। लेकिन पैराशूटिंग (स्काईडायविंग) के प्रति उनके जबरदस्त जुनून ने उन्हें इस बेहद कठिन और खास मिशन तक पहुँचाया।

इस मिशन का उद्देश्य


​इस वैज्ञानिक मिशन का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष की विपरीत परिस्थितियों और शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) का महिलाओं के शरीर पर पड़ने वाले जैविक व शारीरिक प्रभावों का बारीकी से अध्ययन करना था।

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