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जानें कब है द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी, भगवान गणेश जी की पूजा का विधान, बन रहे यह शुभ योग

आज हम द्विजप्रिय संकष्टी की जानकारी देंगे। सनातन धर्म में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का खास महत्व है। वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इस दिन भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन किया जाता है और कहते हैं कि गणपति जी प्रसन्न होकर अपने भक्तों के जीवन से सभी संकटों को दूर करते हैं।

जानें शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 5 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 9 मिनट पर शुरू होगी और 6 फरवरी को मध्यरात्रि 12 बजकर 22 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में उदयाति​थि के अनुसार द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत 5 फरवरी 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन सुबह 5 बजकर 22 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 15 मिनट तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा शुभ-उत्तम मुहूर्त सुबह 7 बजकर 7 मिनट से लेकर सुबह 8 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। 5 फरवरी को अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।

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