आज हम मई महीने में आने वाली पूर्णिमा व्रत की जानकारी देंगे। पूर्णिमा व्रत हर महीने शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रखा जाता है। यह मुख्य रूप से भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव को समर्पित है। ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा हिंदू धर्म में बेहद पुण्यदायी मानी जाती है। इस दिन गंगा स्नान, भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा, दान-पुण्य और व्रत का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि अधिक मास की पूर्णिमा पर किए गए दान और जप-तप से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
जानें शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा तिथि आरंभ: 30 मई 2026, शनिवार, प्रातः 11:57 बजे से है। ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा तिथि समाप्त:31 मई 2026, रविवार ,दोपहर 02:14 बजे तक। ऐसे में ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का व्रत 30 मई 2026, शनिवार के दिन रखा जाएगा। स्नान-दान की अधिक पूर्णिमा 31 मई 2026, रविवार के दिन रहेगी।
चंद्रोदय समय: सायं 07:36 बजे।
जानें पूजन विधि
पूर्णिमा तिथि साल में 12 बार आती है। इनमें 5 पूर्णिमा तिथि का सबसे अधिक महत्व है। कहते हैं कि पूर्णिमा तिथि के दिन व्रत रखकर चंद्रमा सहित शिव पार्वती और लक्ष्मी नारायण की पूजा करने से धन वैभव की प्राप्ति होती है। सुबह स्नान से पहले व्रत करने का संकल्प लिया जाता है। पवित्र नदी में नहाने के बाद भगवान को अर्घ्य दें । सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। इस दिन विष्णु भगवान के साथ माता लक्ष्मी की पूजा- अर्चना भी करें।भगवान विष्णु के भोग में तुलसी को भी शामिल करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। इस पावन दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का अधिक से अधिक ध्यान करें। पूर्णिमा पर चंद्रमा की पूजा का भी विशेष महत्व होता है। चंद्रोदय होने के बाद चंद्रमा की पूजा अवश्य करें। चंद्रमा को अर्घ्य देने से दोषों से मुक्ति मिलती है। इस दिन आप ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं। इस दिन कंबल, गुड़, तिल जैसी चीजों का दान करना शुभ माना जाता है।