अप्रैल का महीना है। जिसमें वरूथिनी एकादशी है। वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को वैशाख की पहली एकादशी कहते हैं, इसे वरूथिनी एकादशी के नाम से जानते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वरूथिनी एकादशी का व्रत और पूजा करने से पाप, कष्ट और भय से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है और जीवन के कष्ट कम होते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, साल भर में कुल 24 एकादशी आती हैं और हर एकादशी का अलग धार्मिक महत्व होता है।
बन रहे शुभ योग
इस साल वरूथिनी एकादशी पर 2 शुभ योग बनेंगे। वरूथिनी एकादशी पर शुभ योग प्रात:काल से लेकर शाम 05:17 बजे तक है, उसके बाद से शुक्ल योग बनेगा। वरूथिनी एकादशी पर धनिष्ठा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 04:03 बजे तक है, उसके बाद शतभिषा नक्षत्र है। स्कंद पुराण में वरुथिनी एकादशी व्रत का फल हजारों वर्षों की तपस्या के बराबर बताया गया है।
जानें शुभ मुहूर्त
इस बार वरुथिनी एकादशी तिथि 13 अप्रैल 2026 को रात 1:17 बजे शुरू होगी और इसका समापन 14 अप्रैल 2026 को रात 1:08 बजे होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल 2026, सोमवार को रखा जाएगा और इसका पारण 14 अप्रैल 2026 को द्वादशी तिथि में किया जाएगा।
वरूथिनी एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05:58 बजे से लेकर 07:34 बजे तक और सुबह 09:10 बजे से लेकर 10:46 बजे तक है।
स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:28 से 05:13 बजे तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:56 बजे से लेकर दोपहर 12:47 बजे तक है।
13 अप्रैल को वरूथिनी एकादशी का व्रत रखेंगे, तो इस व्रत का पारण 14 अप्रैल को होगा। पारण का समय सुबह में 06 बजकर 54 मिनट से लेकर 08 बजकर 31 मिनट तक है। पारण के दिन हरि वासर का समापन सुबह 06 बजकर 54 मिनट पर होगा।