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उत्तराखंड: लगातार बढ़ती हुई विकास दर के बावजूद अल्मोड़ा सबसे निर्धन, जानें

उत्तराखंड ने वर्ष 2020-21 महामारी के कारण पूरी तरह से चरमरा चुकी अर्थव्यवस्था को वर्ष 2021-2022 में फिर से ऊंचाइयों की तरफ अग्रसर कर दिया है। हालांकि कोरोना काल में विकास दर 4.42 प्रतिशत ऋणात्मक हो गयी थी जो कि वर्ष बीते एक वर्ष में 6.13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ आगे बढ़ रही है।


कोरोना काल में ठप पड़े निर्माण, परिवहन और व्यापार क्षेत्र में उच्च वृद्धि दर

कोरोना महामारी ने उत्तराखंड के निवासियों के आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था। एक बड़े जनसमूह की आजीविका पर संकट आ गया था। ख़ास तौर पर परिवहन, स्थावर संपदा, व्यावसायिक सेवाओं  व्यापार, होटल व जलपान गृह के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों के रोजगार प्रभावित हुए थे और उत्तराखंड में सरकार व् आम जनता मुख्य रूप से पर्यटन पर निर्भर रहती है जो पिछले 2 सालों से ठप पड़ा हुआ था। हालांकि इस साल पर्यटन और व्यवसाय में काफी इजाफा हुआ है जिसका सीधा प्रभाव जीडीपी वृद्धि पर देखा जा सकता है।

राजस्व प्राप्ति और प्रति व्यक्ति आय में हुई बढ़ोतरी

कोरोना काल में राजस्व प्राप्ति 37011 करोड़ थीं, जबकि बीते वर्ष में यह 44151 करोड़ रहने का अनुमान है। इसके साथ ही प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में भी वृद्धि हुई है। 2020-21 में जहाँ प्रति व्यक्ति आय 1,82,698 रुपये थी। अब वहीँ पिछले वर्ष में यह 1,96,282 रुपये अनुमानित है।

प्रदेश में अल्मोड़ा जिला सबसे निर्धन

हालांकि प्रदेश में आर्थिक सुधार हो रहा है लेकिन बहुआयामी गरीबी में उत्तराखंड 15वें स्थान पर है। प्रदेश में 17.72 प्रतिशत जनसंख्या बहुआयामी निर्धन है। इनमें 25.65 प्रतिशत हेड काउंट रेशियो के साथ अल्मोड़ा जनपद सर्वाधिक निर्धन है। यह दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। नगरीय क्षेत्र में चम्पावत जिला सबसे अधिक 20.90 प्रतिशत निर्धन हैं जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वाधिक निर्धनता हरिद्वार में 29.55 प्रतिशत आंकी गयी है।

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