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उत्तराखंड: ईमानदारी से संस्थाओं के प्रमुख नियुक्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक करें : पूर्व सीएम हरीश रावत

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भर्तियों में हुई गड़बड़ियों के मामले में चुप्पी तोड़ी है । अपने सोशल मीडिया अकाउंट में पूर्व सीएम  ने लिखा है कि, ‘भावनाएं व्रत तुड़वा देती हैं। मैंने कहा था कि मैं भर्तियों को लेकर 2 माह तक कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष के विवेक पर मैंने भरोसा जताया था। ऐसी लिस्टें आ रही हैं, कितनी सच हैं, कितनी गलत हैं, मैं नहीं जानता। लेकिन समझ में नहीं आ रहा है कि यह सब कैसे हुआ है। संस्थाएं हमने खड़ी की हैं, चाहे कोई भी विश्वविद्यालय हो। उनमें यदि नियुक्तियां हुई हैं तो चिंताजनक है। संस्थाएं नष्ट हो जाएंगी।

ईमानदारी से अपनी संस्थाओं में हुई नियुक्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक करें

मैं तू-तू, मैं-मैं में नहीं पढ़ना चाहता। इसलिए इस सारे प्रकरण से अपने को असंबद्ध करते हुए मैं उन संस्थाओं के प्रमुखों से कहना चाहता हूं कि ईमानदारी से अपनी संस्थाओं में हुई नियुक्तियों का ब्यौरा सार्वजनिक करें। केवल कह देने भर से नहीं होगा। नियुक्तियां यदि अस्थाई आधार पर भी हुई हैं या नियुक्तियां किसी आधार पर भी हुई हों, उस सबका ब्यौरा साझा होना चाहिए। मैं व्रत नहीं तोड़ता, यदि मेरे मन पर आघात नहीं लगता। क्योंकि यह संस्थाएं कांग्रेस के कार्यकाल में खड़ी हुई हैं, हम इन संस्थाओं पर गर्व करना चाहते हैं।

उत्तराखंड से क्षमा ही मांग सकता हूं

जब संस्थाएं टूटती व बिखरती हैं तो उसका कितना नुकसान समाज व राज्य को होता है। इसका आभास हमको अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में हुई गड़बड़ से हुआ है न? फिर भी कुछ लोग मेरे दर्द को समझे बिना बुरा-भला कह रहे हैं। खैर विष पीने की मेरी आदत है। वो कहें वो विष मैं पी लूंगा। मगर अब इन संस्थाओं को बचाने के लिए अपने दर्द को मैं नहीं रोक पाया, उसके लिए मैं उत्तराखंड से क्षमा ही मांग सकता हूं।

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