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ललित योगी के कुछ भाव इस तरह…चेहरे के गम को तुम छुपाए रखो..


  1. चेहरे के गम को तुम छुपाए रखो।
    दबी हुई मुस्कान है सजाए रखो।।
    ©अनकही स्मृतियां

  2. गुरूर इतना है उनको खुद पर,
    कि चेहरा भी चेहरा नहीं लगता।
    मुझे उनके हाल पर भी अब
    तरस खाना अच्छा नहीं लगता।।
    ©अनकही स्मृतियां
    3.
    गुरुर जब सिर पर चढ़ कर सवार हो तो
    खुद की कमियां भी दिखाई नहीं देती।
    अच्छे भी बुरे हो जाते हैं नज़र में उनकी,
    खुद में खुद की तस्वीर दिखाई नहीं देती।।
    © अनकही स्मृतियां

  3. तमाशबीन हैं वो,
    जो तमाशा देखा करते हैं।
    मूर्ख हैं वो,
    जो तमाशा करते हैं।।
    बेकार हैं वो,
    जो चटकारे लिया करते हैं।
    और पागल हैं वो
    जो हीरे को कोयला समझते हैं।
    ©अनकही स्मृतियां

  4. वक़्त है खराब,
    एक दिन ये बदल जायेगा।
    सब्र करो जरा,
    जीवन सफल हो जाएगा।।
    ©अनकही स्मृतियां

6.इन दिनों चुपचुप सा रहने लगा हूँ।
सच कहूं तो खुद में खोने लगा हूँ।।
©अनकही स्मृतियां
7.
कुहासे छंट ही जायेंगे!
ईमान और सच्चाई रखो।
बड़े बनो या फिर न बनो,
एक अच्छा इंसान तो बनो।।
©अनकही स्मृतियां
8.
जो टिकाऊ होंगे, वो जिंदगी में जरूर थमेंगे।
जो खस्ता होंगे, कुहासे की तरह छंट जायेंगे।।
©अनकही स्मृतियां
9.
आपाधापी में,खुद को ही,
मैं जाने कैसे भूल गया।
जिंदगी सी रेलपटरी में
जैसे पीछे सबकुछ छूट गया।
©अनकही स्मृतियां

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