October 22, 2021

अदिति महाविद्यालय में ऑनलाइन विशेष व्याख्यान श्रृंखला में ‘प्रिंट माध्यमों की सृजनात्मकता और विज्ञापन’ विषय पर हुआ व्याख्यान

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अदिति महाविद्यालय दिल्ली,विश्वविद्यालय के हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा चलाई जा रही ऑनलाइन विशेष व्याख्यान श्रृंखला के तहत प्रोफेसर अरुण भगत ने ‘प्रिंट माध्यमों की सृजनात्मकता और विज्ञापन’ विषय पर अपना व्याख्यान दिया।
कार्यक्रम की संयोजिका और अदिति महाविद्यालय के ‘हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की  प्रोफेसर माला मिश्रा ने  विशेषज्ञ वक्ता का परिचय देते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की।

हमारे आसपास जो भी घटित हो रहा है वह एक दिन इतिहास बन जाएगा।

अपने व्याख्यान में प्रोफेसर अरुण भगत ने कहा कि पत्रकारिता को जल्दीबाजी में लिखा गया साहित्य कहते हैं। हम जो भी दिन-प्रतिदिन लिख रहे हैं वह साहित्य ही है हमारे आसपास जो भी घटित हो रहा है वह एक दिन इतिहास बन जाएगा। हम अपने इतिहास को उस समय के साहित्य के जरिए खोजते हैं। उन्होंने कहा कि समाचार आज के समय में हमारे लिए आवश्यक है समाचार अर्थात हमारे चारों तरफ जो भी घटित हो रहा है उसकी सूचना हमारे लिए समाचार है। पत्रकारिता में आज हम नवीन विचारों को देख रहे हैं। इसी के माध्यम से हम एक-दूसरे से परिचित हुए हैं, जुड़े रहे हैं,  विचारों को साझा कर रहे हैं। यह पत्रकारिता ही है। पत्रकारिता ने हमें एक-दूसरे से मिलाया है और हमें एक दूसरे के जीवन से जुड़ने के लिए सहयोग किया है। इसने ही देश-दुनिया को जानने के लिए हमें रास्ता दिया है।
उन्होंने कहा कि प्रिंट मीडिया आज के समय में बहुत फलफूल रहा है। हम इसके सहारे नवीन जानकारियां ग्रहण कर रहे हैं। यह आज के समय में हमारे लिए जरूरी हो गया है। 

सत्यम शिवम सुंदरम की अभिव्यक्ति ने पत्रकारिता को बल दिया है।

विज्ञापनों के संदर्भ में कहा कि पत्रकारिता में विज्ञापनों को हम देख रहे हैं। विज्ञापन हमारे जीवन से जुड़ चुके हैं। विज्ञापनों का संसार हमारे सामने उमड़ पड़ा है। विज्ञापन सूचना पहुंचाने का माध्यम है।  विज्ञापन सूचना पहुंचाने का एक माध्यम है। यह जनता को सूचित करता है, शिक्षित करता है, मनोरंजन करता है और रचनात्मकता पैदा करता है। विज्ञापन भी एक तरीके से विचार ही है वह दूसरे व्यक्ति को प्रभावित करने के लिए कार्य करते हैं। विज्ञापनों ने हमारे जीवन को प्रभावित किया है। हमारी जीवन-शैली को प्रभावित किया है।हमारे मन-मस्तिष्क को प्रभावित करके रख दिया है। हमारे आस-पास विज्ञापन की दुनिया है।हम विज्ञापनों से घिरे हैं । पत्रकारिता में आने के लिए हमें रचनात्मक होना पड़ेगा। प्रिंट मीडिया में रचनात्मकता बहुत आवश्यक है। यदि हम पत्रकारिता जगत में कदम रखना चाहते हैं तो हमें इसका ध्यान विशेष रूप से रखना होगा। रचनात्मकता के बिना पत्रकारिता की कल्पना नहीं की जा सकती। सत्यम शिवम सुंदरम की अभिव्यक्ति ने पत्रकारिता को बल दिया है।

रचनात्मकता के कारण पत्रकारिता ने सभी को जोड़ा है। इन माध्यमों से जन-समाज में जागृति पैदा हुई है

सामाजिक मूल्यों,व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए मुद्रित माध्यमों का विशेष योगदान है। पत्र-पत्रिकाओं, समाचार पत्रों ने समाज को जागरुक बनाया है।  रचनात्मकता के कारण पत्रकारिता ने सभी को जोड़ा है। इन माध्यमों से जन-समाज में जागृति पैदा हुई है। यह जनता को जगाती है।  सामाजिक मूल्य और मानदंडों की स्थापना केवल और केवल रचनात्मकता से ही संभव है। उन्होंने कहा कि जीवन के साथ तदात्मीकरण से ही रचनात्मकता उत्पन्न होती है। रचनात्मकता, सामाजिक जीवन की वेदना से उत्पन्न होती है। उन्होंने कहा कि स्तंभ लेखन वर्तमान में रचनात्मकता का एक विशेष हस्ताक्षर है। उन्होंने मुद्रण माध्यम, रचनात्मकता और  विज्ञापन के संदर्भ में कई अन्य पहलुओं पर भी विस्तार से चर्चा की।

व्याख्यान श्रृंखला के आयोजन अवसर पर  इतने लोग रहे मौजूद

व्याख्यान श्रृंखला के आयोजन अवसर पर प्रतिभा शाह ,आरती, भावना कामना, मानसी, नेहा दीक्षित, कांची गुल्यानी, श्वेता सिंह, सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय,अल्मोड़ा के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के  डॉ ललित चंद्र जोशी आदि मौजूद रहे।