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13 मार्च: आज चीर बांधने के साथ शुरू होगी खड़ी होली, जाने


होली देश के प्रत्येक राज्य में हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है। सभी देशवासियों के लिए यह उल्लास भरा त्योहार होता है। होली का त्योहार भी अब आ गया है। जिले में पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्र में कुमाऊंनी खड़ी होली की धूम आज (रविवार) चीर बंधन के साथ शुरू हो जाएगी। इस बार पहाड़ में 19 और मैदान में 18 मार्च को छलड़ी मनाई जाएगी। जबकि दोनो जगह होलिका दहन 17 मार्च की रात में होगा। इसी के साथ धर्म जागरण समन्वय विभाग के सांस्कृतिक विभाग संयोजक शास्त्री राजेश जोशी ने भी बतलाया कि

फाल्गुन_शुक्ल_पक्ष_व्रत_पर्व-

दुर्गाष्टमी,होलाष्टक प्रारम्भ- 10 मार्च 26 गते फाल्गुन
चीर बंधन,रंगधारण ध्वजारोपण-13 मार्च(प्रातः 10 बजकर 22 मिनट बाद) मासांत
आमलकी एकादशी व्रत,चैत्र मास प्रारम्भ व फूलदेई-14 मार्च 1 गते चैत्र
पूर्णिमा व्रत व होलिका दहन-17 मार्च(रात्रि 9:4 से 10 :14के मध्य)
होली छलड़ी-19 मार्च 6 गते(चैत्र कृष्ण प्रतिपदा)

नोट

14 मार्च को सम्पूर्ण एकादशी तिथि भद्रा से व्याप्त होने के कारण रंगधारण,चीर बंधन 13 मार्च को 10 बजकर 22 मिनट बाद किया जाना शास्त्र सम्मत है।
17 मार्च होलिका दहन के दिन पूर्णिमा तिथि व प्रदोष काल भद्रा से व्याप्त होने के कारण होलिका दहन भद्रापुच्छ रात्रि 9 बजकर 4 मिनट से 10 बजकर14 मिनट के मध्य किया जाना शास्त्र सम्मत है।
इस वर्ष छलड़ी को लेकर लोग भ्रम की स्थिति मे है पर 18 मार्च को सम्पूर्ण पूर्वान्ह में पूर्णिमा तिथि है और छलड़ी सदैव उदयव्यापिनी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा में होती है अतः छलड़ी(होली)19 मार्च को शास्त्र सम्मत है।

आज मंदिरों में चीर बांधने के साथ ही खड़ी होली का शुभारंभ-

इसी के साथ जनपद में एकादशी रविवार को मंदिरों में चीर बांधने के साथ ही खड़ी होली का शुभारंभ होगा। इसी के साथ राग, फाग और रंग ने नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में होली की धूम मचानी शुरू हो जाएगी। चीर बांधने के साथ ही होल्यारों द्वारा घर-घर जाकर खड़ी होली गायन होना शुरू हो जाता है तथा होली के गीतों और रंगों ने वातावरण होलीमय बन जाता है। आज नगर के खत्याड़ी, पांडेखोला, कर्नाटकखोला, पलटन बाजार, दुगालखोला, थाना बाजार, जोशीखोला, थपलिया, सरकार की आली, खोल्टा, पूर्वी पोखरखाली, राजपुरा, लाला बाजार, गुरुरानीखोला में चीर बांधी गई।

जाने क़्यों बांधते है चीर-

मंदिरों में होली से पूर्व एकादशी पर खड़ी होली के पहने दिन चीर बांधने का अपना ही महत्व है। इस दिन लोग बांस के लंबे डंडे में नए कपड़ों की कतरन को बांधकर मंदिर में स्थापित करते हैं। फिर चीर के चारो ओर लोग खड़ी होली गायन करते हैं और घर-घर जाकर खड़ी होली गाते हैं। होलिका दहन के दिन इस चीर को होलिका दहन वाले स्थान पर लाते हैं और बांस में बंधे कपड़ों के कतरन को प्रसाद के रूप में बांटते हैं। जिसे लोग अपने घरों के मुख्य द्वार पर बांधते हैं। ऐसी मान्यता है कि इससे घर में बुरी शक्तियों का प्रवेश नहीं होता और घर में सुख शांति बनी रहती है।

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