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01 मई: आज है बुद्ध पूर्णिमा, यह रहेगा शुभ मुहूर्त, सिद्धि योग में करें शुभ कार्य




आज हम आपको बुद्ध पूर्णिमा की जानकारी देंगे। आज 01 मई 2026 को बुद्ध पूर्णिमा है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा बेहद खास मानी जाती है और बुद्ध पूर्णिमा सबसे ज्यादा शुभ मानी जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। बुद्ध पूर्णिमा पर गौतम बुद्ध और भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन गौतम बुद्ध और भगवान विष्णु का विधि-विधान के साथ पूजा करता है। उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है।


जानें शुभ मुहूर्त


हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल वैशाख पूर्णिमा पर सिद्धि योग सुबह से लेकर रात 9:13 बजे तक प्रभावी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सिद्धि योग में किए गए हर शुभ कार्य का फल कई गुना बढ़ जाता है। वैशाख पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल 2026 की रात 9 बजकर 13 मिनट से शुरू होगी। यह तिथि 1 मई 2026 की रात 10 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। चूंकि धार्मिक कार्यों में उदया तिथि को ज्यादा महत्व दिया जाता है, इसलिए बुद्ध पूर्णिमा इस साल 1 मई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।


भगवान बुद्ध की जयंती


बैद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध का जन्म वैशाख पूर्णिमा तिथि को लुंबिनी में हुआ था। इस वजह से हर साल वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा मनाते हैं। इस साल बुद्ध पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध की 2588वीं जयंती है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बौद्ध धर्म के लोग प्रार्थना करते हैं और उनके बताए मार्ग पर चलने का प्रयास करते हैं। इस तिथि का भगवान बुद्ध के जीवन से गहरा जुड़ाव है। इस तिथि पर उनका जन्म हुआ था और वैशाख पूर्णिमा पर ही कुशीनगर उनका देहांत हुआ था। बोधगया में वैशाख पूर्णिमा के दिन उनको ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। यह तिथि भगवान बुद्ध के जीवन, मरण और ज्ञान प्राप्ति से जुड़ी है।


पूजन विधि


आज सुबह जल्दी उठें और सुबह स्नान आदि करें। इसके बाद मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। इसके साथ ही भगवान बुद्ध की प्रतिमा भी स्थापित करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा करें। इसी के साथ व्रत का संकल्प लें और फिर पानी का घड़ा किसी ब्राह्मण को दान दें। इसके बाद शाम में समय सत्यनारायण कथा का पाठ करें इसके लिए कसार का प्रसाद और चरणामृत जरुर बनाए। भगवान विष्णु को भोग लगाएं और फिर ब्रह्माण को भोजन कराने के बाद ही अपना व्रत खोले।

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