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23 मई: एवरेस्ट फतह के 42 वर्ष: जब बछेंद्री पाल ने तिरंगा फहराकर रचा था इतिहास, भारत की पहली महिला पर्वतारोही बछेंद्री पाल की शौर्य गाथा

आज 23 मई 2026 है। आज ही के दिन बछेंद्री पाल ने 23 मई 1984 को दोपहर 01:07 बजे एक ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल किया था और दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराया था। जब बछेंद्री पाल माउंट एवरेस्ट (8,848 मीटर) की चोटी पर पहुँचने वाली दुनिया की पाँचवीं और भारत की पहली महिला पर्वतारोही हैं। विपरीत परिस्थितियों और कम ऑक्सीजन के बावजूद 29 वर्ष की उम्र में यह कारनामा करके वह एवरेस्ट पर पहुँचने वाली दुनिया की पाँचवीं और भारत की पहली महिला पर्वतारोही बनीं।

भारत की पहली महिला पर्वतारोही

23 मई, 1984 का वह दिन भारतीय इतिहास में ख़ास है क्योंकि बछेंद्री पाल ने इसी दिन माउंट एवरेस्ट की चोटी पर झंडे गाढ़े थे। ऐसा करने वाली वह भारत की पहले महिला पर्वतारोही हैं और यह उपलब्धि उन्होंने  29 साल की उम्र में हासिल की थी‌। इसके बाद बछेंद्री पाल कई पर्वतारोहियों के लिए मिसाल बन गई। बछेंद्री को 1984 में एवरेस्ट के लिए भारत के चौथे अभियान एवरेस्ट 84 के लिए चुना गया‌। इस अभियान में 6 महिलाएं और 11 पुरुष थे। बछेंद्री पाल अकेली महिला थीं जो ऊपर तक पहुंच पाई। वह 23 मई 1984 को दोपहर एक बजे चोटी पर पहुंची। विपरीत परिस्थितियों और कम ऑक्सीजन के बावजूद उन्होंने 23 मई 1984 को ऐतिहासिक सफलता दर्ज की। 1990 में एवरेस्ट चढ़ने वाली भारत की पहली महिला पर्वतारोही के तौर पर उनका नाम गिनीज़ बुक में शामिल किया गया।

सम्मानों से सम्मानित

बछेंद्री पाल का जन्म 24 मई 1954 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के नाकुरी गाँव में हुआ था। पद्मश्री और अर्जुन अवार्ड से सम्मानित बछेंद्री पाल का जन्म उत्तरकाशी में हुआ। पहाड़ों में पली-बढ़ी बछेंद्री के हौसले बचपन से ही बुलंद थे। महज़ 12 साल की उम्र में उन्होंने अपने स्कूल की सहेलियों के साथ खेल-खेल में 13,123 फीट (लगभग 4,000 मीटर) ऊँची चोटी पर चढ़कर अपने पर्वतारोहण के सफर की अनौपचारिक शुरुआत कर दी थी। भारतीय पर्वतारोहण में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार द्वारा उन्हें कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।
पद्मश्री ((1984)
अर्जुन पुरस्कार ((1986)
पद्म भूषण ((2019)

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