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27 मई: अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी आज, भगवान राम और लक्ष्मण के अटूट भ्रातृप्रेम को समर्पित, जानें शुभ मुहूर्त व पूजा की विधि

आज 27 मई 2026 है। आज अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी है। अधिक रामलक्ष्मण द्वादशी (जिसे चंपक द्वादशी भी कहते हैं) ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत भगवान राम और लक्ष्मण के अटूट भ्रातृप्रेम को समर्पित है।

खास है महत्व

2026 में यह विशेष व्रत 27 मई 2026 को मनाया जाएगा, जिस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर राम लक्ष्मण द्वादशी मनाई जाती है। इस बार अधिक मास पड़ रहा है, तो अधिक राम लक्ष्मण द्वादशी के नाम से जाना जाएगा। यह दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम और उनके भाई श्री लक्ष्मण जी को समर्पित है। साथ ही अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। इससे साधक को जीवन में शुभ परिणाम मिलते हैं।

जानें शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि की शुरुआत 27 मई को सुबह 06 बजकर 21 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 28 मई को सुबह 07 बजकर 56 मिनट पर होगा। ऐसे में 27 मई को अधिक राम लक्ष्मण द्वादशी मनाई जाएगी।
ब्रह्म मुहूर्त –
सुबह 04 बजकर 03 मिनट से 04 बजकर 44 मिनट तक
विजय मुहूर्त –
दोपहर 02 बजकर 36 मिनट से 03 बजकर 31 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त –
शाम 07 बजकर 10 मिनट से 07 बजकर 31 मिनट तक
निशिता मुहूर्त –
रात 11 बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 39 मिनट तक

जानें पूजन विधि

द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान के समक्ष हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर में या पूर्व दिशा में एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण जी और माता सीता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। साथ ही श्रीकृष्ण की मूर्ति भी रखें। भगवान को रोली, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, फूल और घी का दीपक अर्पित करें। इस दिन भगवान को चंपा के सुगंधित फूल या कोई भी सफेद अथवा पीले रंग के फूल अवश्य चढ़ाएं। पूजा के दौरान रामायण की चौपाइयों का पाठ करें और प्रभु श्रीराम के मंत्रों का जाप करें। अंत में घी के दीपक या कपूर से आरती करें।

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