नैनीताल से जुड़ी खबर सामने आई है। जिला न्यायालय के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रवि रंजन की अदालत ने स्मैक तस्करी के आरोपी बबलू ठाकुर (निवासी गौजाजाली, हल्द्वानी) को साक्ष्यों के अभाव और पुलिस कार्रवाई में मिली गंभीर खामियों के चलते संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है।
जानें क्या है मामला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा की गई एनडीपीएस (NDPS) एक्ट की कार्रवाई में कई ऐसी कमियां पाई गईं, जिन्होंने अभियोजन के दावों को कमजोर कर दिया। पुलिस ने दावा किया था कि 6 जनवरी 2021 को आरोपी से 4.1 ग्राम स्मैक बरामद हुई थी। हालांकि, विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट में इसका वजन केवल 3.18 ग्राम पाया गया। अभियोजन पक्ष इस बड़े अंतर का कोई ठोस कारण पेश नहीं कर सका। कोर्ट ने माना कि तलाशी के दौरान एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 का उचित पालन नहीं किया गया। आरोपी की तलाशी के वक्त किसी भी राजपत्रित अधिकारी या मजिस्ट्रेट की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की गई थी। मौके पर मौजूद स्वतंत्र गवाह को कोर्ट में पेश नहीं किया गया। भेजने में 4 दिन की देरी की गई। इस विलंब के पीछे पुलिस के पास कोई तर्कसंगत स्पष्टीकरण नहीं था। इस विलंब के पीछे पुलिस के पास कोई तर्कसंगत स्पष्टीकरण नहीं था।
अदालत का आदेश
इन विरोधाभासों और प्रक्रियात्मक त्रुटियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को दोषमुक्त करने का आदेश सुनाया।