October 17, 2021

नवरात्रि के चौथे दिन दुःख -दरिद्रता को दूर करने वाली, माता कुष्मांडा की ऐसे करें, उपासना ।

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नवरात्रि के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है ।  कहा जाता है कि माँ ने सृष्टि की रचना की । सूर्य इनका निवास स्थान माना जाता है । इसलिए माता के इस स्वरुप के पीछे तेज़ दर्शाया गया है । आज के दिन कुष्मांडा माता की पूजा करने से दुःख दरिद्रता दूर होती है ।

आइये जानें माता के इस स्वरुप के बारे में ।

माता का यह स्वरुप बहुत निराला है । क्योंकि सूर्यलोक मे रहने की क्षमता केवल कुष्मांडा माँ में विद्यमान है । नवरात्रि में चौथे दिन देवी को कुष्मांडा के रूप में पूजा जाता है। अपनी मंद, हल्की हंसी के द्वारा अण्ड यानी ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इस देवी को कुष्मांडा नाम से अभिहित किया गया है। जब सृष्टि नहीं थी, चारों तरफ अंधकार ही अंधकार था, तब इसी देवी ने  ब्रह्मांड की रचना की थी। इसीलिए इसे सृष्टि की आदिस्वरूपा या आदिशक्ति कहा जाता है ।
इस देवी की आठ भुजाएं हैं, इसलिए अष्टभुजा कहलाईं। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जप माला है। इस देवी का वाहन सिंह है और इन्हें कुम्हड़े की बलि प्रिय है। संस्कृति में कुम्हड़े को कुष्मांड कहते हैं इसलिए इस देवी को कुष्मांडा कहा जाता है । इस देवी का वास सूर्यमंडल के भीतर लोक में है। सूर्यलोक में रहने की शक्ति क्षमता केवल इन्हीं में है।  ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में इन्हीं का तेज व्याप्त है।

ऐसे करें माता की पूजा ।

नवरात्रि के चौथे दिन सवेरे उठकर स्‍नान कर हरे रंग या संत्री रंग के वस्‍त्र धारण करने के बाद माता को शुद्ध गंगा जल से स्नान करवाएं। और उन्हें साफ़ और नए वस्त्र पहनाएं। घी का अखंड दीपक भी जलायें ।उसके बाद माता रानी व्रत कथा या नवरात्री व्रत कथा का पाठ करें,  फिर आरती करें। और माता रानी को इलायची, सौंफ, फल आदि चढ़ाए । ध्यान रखे की माता की पूजा शांत और अचंचल मन से करें । साथ ही मन्त्रों का उच्चारण भी करते रहें ।

मंत्र इस प्रकार है ।

या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्‍मांडा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

इस प्रकार नवरात्रि के चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा की जाती है ।माता की शांत मन से पूजा, उपासना करने से माता प्रसन्न होती हैं।और माता अपने भक्त जनों के सभी दुःखों को हर लेती हैं ।