October 23, 2021

नवरात्रि के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की उपासना करने से भय अहंकार से मिलती है मुक्ति।

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आज है नवरात्र का तीसरा दिन आज के दिन माता चंद्रघंटा की उपासना करने से भय से मुक्ति मिलती है ।कहा जाता है कि माता की पूजा करने से माँ कल्याणकारी फल प्रदान करती है ।देवी शक्ति का यह स्वरुप अलौकिक ज्ञान प्रदान करने वाला है ।

आइये जाने माता के इस स्वरुप के बारे मे।

चंद्रघण्टा माता के मस्तक पर अर्ध चंद्र विराजमान है ।इसी कारण माता को चंद्रघंटा कहा जाता है ।माता सफ़ेद रंग की माला पहने हुए शेर पर सवार रहती है ।भय से मुक्ति दिलाने मे माता सहायता करती है।

पूजा व्रत कथा ।

पुराणों के अनुसार जब राक्षसो का आतंक देव लोक मे बहुत बढ़ गया था ।तब माँ दुर्गा ने चंद्रघंटा का अवतार लेकर महिषासुर का वध किया था ।उस समय महिषासुर  असुरों का स्वामी था ।वह देवलोक के सिंहासन मे विराजमान होना चाहता था । जब देवगणो को उसकी मंशा के बारे मे पता चला तो वह त्रिदेव् ब्रह्मा विष्णु महेश के पास पहुँच गये ।महिषासुर के अत्याचारों को जानने के बाद त्रिदेव बहुत क्रोधित हुए ।और उनकी मुंह से एक ऊर्जा उत्पन्न हुई ।जिससे देवी का अवतरण हुआ ।इस प्रकार  भगवान् विष्णु ने उन्हें चक्र और ब्रह्मा जी  ने उन्हें कमण्डल और भगवान् शिव ने उन्हें त्रिशूल प्रदान किया ।सभी देवताओं ने उन्हें कुछ न कुछ भेंट स्वरूप प्रदान किया ।सभी लोगो की आज्ञा के पश्चात देवी देवताओं की रक्षा के लिए महिषासुर के पास गई ।माता का स्वरुप देख कर वह समझ गया था कि अब उसका अंत निश्चित है ।बावजूद इसके उसने और अन्य असुरगण ने माता पर हमला करना प्रारंभ कर दिया ।और भयंकर युद्ध के बाद महिषासुर को उसके किये की सजा मिली और वह काल के ग्रास मे समां गया ।

पूजा की विधि ।

सुबह उठकर स्नान  करने के बाद घर साफ़ करने के पश्चात माता रानी की मूर्ति को भी गंगा जल या शुद्ध जल से स्नान कराएं।इसके बाद माता रानी को सुनहरे रंग के वस्त्र पहनाए।इसके बाद माता को पुष्प अर्पित करें।और घी का अखंड दीपक भी जलाएं।दुर्गा चालीसा का पाठ या सप्तसती चंद्रघंटा व्रत कथा करने के बाद माता रानी की आरती उतारें।और उन्हें
मिश्री या पंचामृत मिठाई आदि का भोग लगाएं।
साथ ही मन्त्रों का उच्चारण भी करते रहे ।

महामंत्र –  

‘या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नसस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:‘ 

ये मां का महामंत्र है जिसे पूजा पाठ के दौरान यह मन्त्रों का जाप करे।

मां चंद्रघंटा का बीज मंत्र है- ‘ऐं श्रीं शक्तयै नम:’।
इस प्रकार माता अपने भक्तजनों की सदैव रक्षा करती है ।