September 30, 2022

17 अगस्त: आज है स्वास्थ्य व समृद्धि का प्रतीक लोकपर्व घी संक्रांति, आज इस चीज का अवश्य करें सेवन

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आज‌ 17 अगस्त है। आज घी संक्रांति पर्व है। आज भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। आज सूर्य का राशि परिवर्तन है। आज सिंह संक्रांति है।‌ इसे घी संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है।

पौराणिक मान्यता-

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भाद्रपद सिंह संक्रांति का पुण्यकाल 17 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर आरंभ हो जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक, सिंह संक्रांति के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देना विशेष रूप से पुण्यदायी माना गया है। इसके अतिरिक्त, भगवान विष्णु और भगवान नरसिंह का नारियल पानी और दूध से अभिषेक करने का भी विधान है। इतना ही नहीं, सिंह संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान आदि कार्यों से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

उत्तराखंड में लोकपर्व के रूप में मनाने की है परंपरा-

उत्तराखंड में इसे लोकपर्व के रूप में मनाने की परंपरा है। 17 अगस्त 2022 को सूर्य देवता सिंह राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्य प्रात: 07 बजकर 14 मिनट पर बजे अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करेगें। सिंह संक्रांति को घृत संक्रांति या घी संक्रांति, ओलगिया संक्रांति भी कहा जाता है। इस दिन दान करने और पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। इस दिन घी का सेवन करना शुभ माना गया है।

जानें ‌घी खाने की परंपरा-

सिंह संक्रांति या सूर्य संक्रांति के दिन पूजा-पाठ, स्नान-ध्यान और दान-पुण्य के साथ-साथ घी खाने का महत्व है। आयुर्वेद में चरक संहिता के अनुसार गाय का घी बेहद शुद्ध और पवित्र होता है। ऐसी मान्यता है कि जो भी जातक सूर्य संक्रांति के दिन घी का सेवन करता है, उसके यादाश्त, बुद्धि, बल, ऊर्जा और ओज में वृद्धि होती है. इसके अलावा गाय का घी वसावर्धक है, जिसे खाने से व्यक्ति को वात, कफ और पित्त दोष जैसी परेशानियां नहीं होती हैं। गाय का घी हमारे शरीर से विषैले पदार्थ को बाहर निकाल देता है। सिंह संक्रांति के दौरान लगभग 1 महीने के इस समय में रोज़ाना सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई व्यक्ति सूर्य संक्रांति के दिन घी नहीं खाता, तो अगले जन्म में वह घोंघे के रूप में जन्म लेता है। यही कारण है कि सूर्य संक्रांति के दिन घी खाने का विशेष महत्व बताया गया है।