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Presidential Election 2022: द्रौपदी मुर्मू बनी देश‌ की 15वीं राष्ट्रपति, रचा एक नया इतिहास

हर किसी के मन में यही सवाल था कि कौन होगा देश का 15वां राष्ट्रपति? इस सवाल का जवाब आज‌ मिल गया है। देश के 15 वें राष्ट्रपति के चुनाव के लिए मतगणना हो गई है। आदिवासी महिला द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल कर इतिहास रच लिया है। भारतीय इतिहास का आज गौरवशाली क्षण है। पहली बार कोई आदिवासी महिला इस देश की राष्ट्रपति चुनी गई हैं।

भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू-

द्रौपदी मुर्मू भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति है, जबकि भारत की दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। दिन भर वोटों की गिनती की गई, जिसमें द्रौपदी मुर्मू ने विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को हराकर जीत हासिल की। द्रौपदी मुर्मू को 5,77,777 वोट मिले हैं और देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति बन गई हैं। द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनने जा रही हैं। एक आदिवासी महिला के लिए यह सफ़र तय करना आसान नहीं रहा होगा। इसका अंदाज़ केवल इसी बात से लगाया जा सकता है आज़ादी के 74 साल बीतने के बावजूद मुर्मू पहली आदिवासी और दूसरी महिला राष्ट्रपति बनने जा रही हैं।

राष्ट्रपति चुनाव परिणाम-

आज देश को 15वां राष्ट्रपति मिल गया है। मौजूदा समय में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है। जिसके बाद आज चुनी गई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का शपथ ग्रहण 25 जुलाई को होगा।

ओडिशा के इस गांव में हुआ जन्म-

द्रौपदी मुर्मू का जन्म 20 जून साल 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के उपरबेड़ा गांव में हुआ था। मुर्मू संथाल आदिवासी परिवार से आती हैं। उनके पिता का नाम बिरंची नारायण टुडू था। वह किसान थे। द्रौपदी मुर्मू की शादी श्याम चरण मुर्मू से हुई थी। दोनों से चार बच्चे हुए। इनमें दो बेटे और दो बेटियां। साल 1984 में एक बेटी की मौत हो गई। इसके बाद 2009 में एक और 2013 में दूसरे बेटे की अलग-अलग कारणों से मौत हो गई। 2014 में मुर्मू के पति श्याम चरण मुर्मू की भी मौत हो गई है। बताया जाता है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ गया था। अब उनके परिवार में सिर्फ एक बेटी है। जिनका नाम इतिश्री है।

संघर्षभरा रहा जीवन-

1979 से 1983 तक द्रौपदी मुर्मू सिंचाई विभाग में जूनियर असिस्टेंट के पद पर कार्यरत रहीं। 1994 से 1997 तक वह शिक्षक के रूप में काम कर रही थीं। आखिरकार, 1997 में वह राजनीति में आ गईं। वह रायरंगपुर नगरपालिका में भाजपा की पार्षद बनीं और इसी चुनाव में वह नगरपालिका अध्यक्ष भी बन गईं। द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के मयूरभंज जिले की रायरंगपुर सीट से 2000और 2009में भाजपा के टिकट पर दो बार जीती और विधायक बनी। ओडिशा में नवीन पटनायक के बीजू जनता दल और भाजपा गठबंधन की सरकार में द्रौपदी मुर्मू को 2000और 2004 के बीच वाणिज्य, परिवहन और बाद में मत्स्य और पशु संसाधन विभाग में मंत्री बनाया गया था। उन्होंने मंत्री के बतौर क़रीब दो-दो साल तक वाणिज्य और परिवहन विभाग और मत्स्य पालन के अलावा पशु संसाधन विभाग संभाला। तब नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल (बीजेडी) और बीजेपी ओडिशा मे गठबंधन की सरकार चला रही थी। साल 2009 में जब वे दूसरी बार विधायक बनीं, तो उनके पास कोई गाड़ी नहीं थी। उनकी कुल जमा पूंजी महज 9 लाख रुपये थी और उन पर तब चार लाख रुपये की देनदारी भी थी। उन्हें ओडिशा में सर्वश्रेष्ठ विधायकों को मिलने वाला नीलकंठ पुरस्कार भी मिल चुका है। साल 2015 में जब उन्हें पहली बार राज्यपाल बनाया गया, उससे ठीक पहले तक वे मयूरभंज जिले की भाजपा अध्यक्ष थीं। वह साल 2006 से 2009 तक उन्होंने भाजपा के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। साथ ही वह भाजपा की आदिवासी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य भी रहीं है।

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