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महिला की खुद की एक पहचान है, वह किसी की जागीर नहीं- सुप्रीम कोर्ट

देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक सुनवाई में अपना फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सिक्किम की एक महिला को महज इसलिए आयकर अधिनियम के तहत छूट से बाहर रखे जाने को भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक बताया क्योंकि उसने एक अप्रैल, 2008 के बाद एक गैर-सिक्किम व्यक्ति से शादी की थी। कोर्ट ने कहा कि 2008 के बाद एक गैर-सिक्किम व्यक्ति से शादी करने वाली सिक्किम की महिला को आयकर अधिनियम की धारा 10 (26एएए) के तहत छूट के लाभ से वंचित करना, मनमाना, भेदभावपूर्ण और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है।

महिला किसी की जागीर नहीं

जिस पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम. आर. शाह और जस्टिस बी. वी. नागरत्ना की पीठ ने कहा कि महिला किसी की जागीर नहीं है और उसकी खुद की एक पहचान है। कोर्ट ने कहा कि सिक्किम की महिला को इस तरह की छूट से बाहर करने का कोई औचित्य नहीं है। पीठ ने कहा, इसके अलावा, यह कदम स्पष्ट रूप से भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 से प्रभावित है। भेदभाव लैंगिक आधार पर है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का पूर्ण उल्लंघन है।

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