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03 नवंबर: स्पेस डॉग लाइका: अंतरिक्ष पर जाने वाली पहली डाॅग लाइका की कहानी, जिसकी धरती पर कभी नहीं हुई वापसी, कहानी कर देगी आपको भावुक, याद में बना है स्टेच्यू

आज 03 नवंबर 2025 है। आज‌ ही के दिन 3 नवंबर, 1957 को सोवियत संघ के स्पुतनिक 2 यान में पहली कुतिया लाइका ने पृथ्वी की कक्षा की यात्रा की। 

पृथ्वी की परिक्रमा करने वाली पहली जानवर थी लाइका

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लाइका अंतरिक्ष में जाने वाली पहली जानवर नहीं थी, लेकिन पृथ्वी की परिक्रमा करने वाली पहली जानवर थी। उसका मिशन सोवियत संघ के लिए एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता थी और इसने अंतरिक्ष की दौड़ में संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़ दिया। वह अंतरिक्ष में पहुंचने के लगभग सात घंटे बाद, अत्यधिक तनाव और गर्मी के कारण मर गई थी। यह कुतिया अंतरिक्ष यात्री बनी थी और पूरे सोवियत की हीरो बन गई थी। ये करीब 68 साल पहले हुआ था और इस कुतिया का नाम लाइका था। उड़ान के चौथे सर्किट तक उसकी मौत हो गई, क्‍योंकि यान में जरूरत से ज्‍यादा गर्मी हो गई थी। स्‍पूतनिक 2 को सुरक्षित वापसी के हिसाब से तैयार नहीं किया गया था, ऐसे में मिशन के बाद विज्ञान में जानवरों पर परीक्षण पर बड़ी बहस शुरू हुई।

लाइका की कहानी

रिपोर्ट्स के मुताबिक लाइका एक सड़कों पर घूमने वाली कुतिया थी। मॉस्को की सड़कों पर घूमने वाली लाइका का असली नाम कुद्रजावका था, जिसका रूसी में मतलब घुंघराला होता है। लाइका को रूसी स्पेस वैज्ञानिकों ने मॉस्को की सड़क से उठाया था। उसे इसलिए चुना गया क्योंकि वह छोटी, शांत और कठिन परिस्थितियों में रही थी। उसका वजन सिर्फ 6 किलो था। उसकी उम्र करीब दो साल थी। सोवियत साइंटिस्ट्स ने लाइका को स्पेस के लिए खास ट्रेनिंग दी थी।‌ 3 नवंबर, 1957 को लाइका को स्पुतनिक-2 से लॉन्च किया गया। इस कैप्सूल में खाना, पानी और गद्देदार दीवारें थीं लेकिन इसकी वापसी की कोई योजना नहीं थी। कहा जाता है कि लाइका ने स्पुतनिक 2 में बैठकर पृथ्वी के ऑर्बिट में स्पेस के चक्कर भी लगाए। इस मिशन का मकसद यह समझना कि स्पेस में जाने पर इंसान के शरीर पर क्या असर पड़ेगा। उसकी तस्वीरें आज भी दुनिया को भावुक करती हैं, जब वह कैप्सूल लॉन्च से पहले खामोशी से बैठी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक सोवियत वैज्ञानिकों ने बताया था कि लाइका के शरीर से उन्हें अगले 10 दिन तक काफी जरूरी डेटा मिला। सोवियत अधिकारियों ने कहा था कि लाइका की कुर्बानी ने उनके स्पेस टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। लाइका रूस में इतनी मशहूर हूई कि उसके स्टेच्यू पूरे देश में लगाए गए। 2008 में रूस ने लाइका को समर्पित एक स्‍मारक बनाया, जिसमें एक कुत्‍ता रॉकेट के शीर्ष पर बैठा है। स्पेस में जाने के बाद उसको दुनिया ने लाइका के नाम से जाना। आज भी स्पेस साइंस की दुनिया में लाइका को याद किया जाता है। रूस ने 1957 में यानी 68 साल पहले करीब तीन वर्षीय लाइका को रॉकेट में बैठाया था। 

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