July 3, 2022

7 नवम्बर – राष्‍ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस : कैंसर पीड़‍ितों के लिए वरदान साबित हो सकती है समय पर जांच

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2020 में जब कोविड-19 आया तो हाहाकार मच गया, हर जगह एक डर का माहौल बन गया। इसमें कोई दो राय नहीं है कि यह वायरस बेहद खतरनाक है। इस चपेट में आने वाले लोगों की सांसें कब रुक जाएं किसी को पता नहीं होता, लेकिन इसके अलावा भी तमाम बीमारियां हैं, जो हर साल लाखों लोगों का मौत के घाट उतार देती हैं। उनमें सबसे खतरनाक बीमारी है कैंसर। पिछले तीन वर्षों में हर साल देश में करीब 7 लाख लोगों की मौत कैंसर से हुई। दरअसल यह आंकड़ा नीचे आ सकता है, अगर लोग समय रहते जांच करवा लें। जी हां समय पर जांच कैंसर पीड़‍ितों के लिए वरदान साबित हो सकती है। 
7 नवम्बर को जब देश राष्‍ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाने जा रहा है, तो एक नज़र पिछले वर्षों के आंकड़ों पर डालना तो बनता है। लोगों को कैंसर के कारकों, उपचार और कैंसर के लक्षणों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्‍य से हर साल राष्‍ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत केंद्रीय स्वास्थ्‍य मंत्री डा. हर्षवधर्न ने इस दिवस को मनाने की घोषणा वर्ष 2014 में की थी। 

भारत में कैंसर के कुल मामले    

2027 :  12,92,534
2018 :  13,25,232
2019 :  13,58,415

भारत में कैंसर से मौतें

2027 :  7,15,010
2018 :  7,33,139
2019 :  7,51,517

केंद्रीय स्वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन ने पहली बार प्रदेश स्तर पर कैंसर नियंत्रण अभियान चलाया। इस मौके पर विभिन्न आयोजनों के माध्‍यम से सरकारी अस्पतालों, स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों, मुनिस्‍पल क्लीनिक, आदि में मुफ्त कैंसर जांच को प्रोत्साहित किया जाता है। आम जनता को कैंसर का बेहतर इलाज सरकारी अस्‍पतालों में मुहैया कराना ही सरकार का मकसद है। बात अगर कैंसर से होने वाली मृत्यु की दर की करें तो भारत में यह दर बाकी देशों की तुलना में काफी कम है। इसे और कम करने के लिए जरूरी है कि समय रहते पता चल जाए। क्योंकि अगर समय रहते कैंसर का पता चल जाए, तो इलाज आसान हो जाता है और कैंसर ठीक भी हो जाता है। 

भारत में कैंसर से जुड़े कुछ तथ्‍य 

> राष्‍ट्रीय कैंसर नियंत्रण कार्यक्रम की स्थापना 1975 में की गई थी। 1984-85 से समय पर जांच पर जोर दिया जाने लगा।  

> भारत में कुल कैंसर के मामलों में से 27.1% प्रतिशत मामले तम्बाकू के सेवन से होते हैं 

> आईसीएमआर के अनुमान के मुताबिक वर्ष 2020 के अंत तक भारत में कैंसर के मरीजों की संख्‍या बढ़ कर 13.9 लाख हो सकती है और 2025 तक 15.7 लाख।

> विश्‍व स्वास्थ्‍य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 10 में से एक व्‍यक्ति में कैंसर बनने की आशंका है।  

> भारत में सबसे ज्यादा 162,500 मामले ब्रेस्ट कैंसर हैं।

> ब्रेस्ट कैंसर के मामले शहरों में 1.4 प्रतिशत और ग्रामीण इलाकों में 2.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं। 

> देश में मुंह के कैंसर के करीब 1 लाख 20 हजार केस हैं।

> देश में सरवाइकल कैंसर के 97 हजार, लंग कैंसर के 68 हजार, पेट के कैंसर के 57 हजार, कोलोरेक्टर कैंसर के 57 हजार मामले हैं।

> पुरुषों की बात करें तो 5.7 लाख नए मामलों में 92 हजार मामले मुंह के कैंसर के आये और 49 हजार मामले लंग कैंसर के। इससे साफ है कि गुटखा और धूम्रपान कैंसर के प्रमुख कारक हैं। 

> कैंसर समेत नॉन कम्‍युनिकेबल डिज़ीज़ेज की समय पर जांच को बढ़ावा देने के लिए देश भर में जिला स्तर पर 599 और कम्‍युनिटी स्वास्थ्‍य केंद्र के स्तर पर 3274 एनसीडी क्लीनिक स्थापित की गई हैं।

> कोई भी व्‍यक्ति निकटतम स्वास्थ्‍य केंद्र में जा कर कैंसर की जांच करवा सकता है।

> मुंह के कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर और सरवाइकल कैंसर की रोकथाम व इलाज आयुष्‍मान भारत – हेल्थ एंड वेलनेस स्‍कीम का अभिन्न अंग है।
 
> कई प्रकार के कैंसर का इलाज आयुष्‍मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत भी किया जाता है।