October 16, 2021

अब शहरों को मिलेगी प्रदूषण से मुक्ति, जैव उत्पादन परियोजना की हो रही शुरुवात

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वर्तमान में भारत में दिन प्रतिदिन ऊर्जा की मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। वर्तमान में ऊर्जा का उपयोग मुख्य रूप से खाना बनाने, प्रकाश की व्यवस्था करने और कृषि इत्यादि कार्यों में किया जा रहा है। ऐसे में इस कमी को पूरा करने के लिए देश में सरकार व निजी कंपनियां विभिन्न स्तर पर कार्य कर रही हैं। जो आगामी समय में देश को जैव ईंधन उपलब्ध कराएगी। यह पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए बनायी जा रही है ।

महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के रायपुर में जमीनी स्तर पर जैव ईंधन उत्पादन परियोजना की, की जाएगी शुरुवात

एक निजी कंपनी,  महाराष्ट्र के गोंदिया जिले के रायपुर में जमीनी स्तर पर जैव ईंधन उत्पादन परियोजना शुरूवात करेगी।  यह परियोजना करीब 25 एकड़ भूमि पर स्थापित की जा रही है। तकनीकी और वित्तीय सहायता मुंबई की एक कंपनी द्वारा प्रदान की जा रही है, जबकि ईंधन उत्पादन की तकनीक जर्मन से ली जा रही है।

गीली घास से कैसे करते हैं गैस उत्पन्न ?

इसमें बायोरिएक्टर घास, गीले कचरे, गीली घास से गैस उत्पन्न करते हैं और शुद्धिकरण के बाद इसका उपयोग दोपहिया, चौपहिया और मालवाहक वाहनों के लिए किया जा सकता है। इस गैस का उपयोग खाना पकाने के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र में भी किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट के लिए गोंदिया के हर गांव में घास लगाई जाएगी। चूंकि यह गीले कचरे और गीली घास का उपयोग करेगा, यह स्वचालित रूप से गांव को साफ रखने में मददगार साबित होगा ।

यह पर्यावरण के लिहाज़ से भी है उपयोगी

इस गैस की उत्पादन प्रक्रिया पूर्णतः प्रदूषण मुक्त होती है यदि इसका उपयोग वाहनों में किया जाए तो वाहनों से होने वाले प्रदूषण को पचास प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। इसलिए जैव ईंधन मौजूदा प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण आर्थिक तनाव का एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है।