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10 अक्टूबर: आज है वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी, भगवान गणेश की पूजा का विधान, जीवन में आने वाले सभी विघ्न होते हैं दूर, जानें शुभ मुहूर्त

आज 10 अक्टूबर 2025 है। आज वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी है। सनातन धर्म में कार्तिक महीने का खास महत्व है। इस महीने जगत के पालनहार भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा से जागृत होते हैं। हर साल कार्तिक महीने में वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। यह दिन भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन में आने वाले सभी विघ्न दूर हो जाते हैं और साधक पर गणेश जी की कृपा बनी रहती है।

जानें शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 09 अक्टूबर को रात 10 बजकर 54 मिनट पर शुरू होगी और 10 नवंबर को शाम 07 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगी। सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। अत: 10 अक्टूबर को वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी पर चंद्रोदय संध्याकाल 08 बजकर 13 मिनट पर होगा। संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र दर्शन किया जाता है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का व्रत शुक्रवार 10 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस शुभ अवसर पर चंद्र दर्शन का शुभ योग शाम 08 बजकर 13 मिनट पर है।

जानें पूजन विधि

आज प्रात: स्नान करने के बाद सबसे पहले सूर्य देव की पूजा करके उनको जल अर्पित करें। उसके बाद हाथ में जल, अक्षत् और फूल लेकर चतुर्थी व्रत और गणेश पूजा का संकल्प ले। पूजा के शुभ मुहूर्त में गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करें। उनको जनेऊ, वस्त्र, मौली, सिंदूर, चंदन, अक्षत्, धूप, दीप, गंध, दुर्वा, लाल पुष्प, माला, फल, हल्दी आदि अर्पित करते हुए पूजा करें। अब गणपति बप्पा को उनका पसंदीदा भोग मोदक या फिर बूंदी के लड्डुयों का भोग अर्पित करें।‌ उसके बाद गणेश चालीसा और विनायक चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें। इसके बाद गणेश जी की घी से आरती करें। उसके पश्चात पूजा में कमियों के लिए क्षमा मांग लें और जीवन में सुख, समृद्धि, सफलता प्रदान करने या मनो​कामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करें । आज आप ओम गं गणपतये नम: का मंत्रो का उच्चारण करते रहें। आज आप अ​पनी क्षमता के अनुसार वस्त्र, अन्न, धन आदि का दान भी कर सकते हैं।

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