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26 अक्टूबर विलय दिवस: आज के ही दिन जम्मू-कश्मीर का भारत के साथ हुआ था विलय, आज भी इतिहास में अमर है यह गाथा

आज 26 अक्टूबर 2025 है। आज 26 अक्टूबर को जम्मू और कश्मीर के विलय दिवस के रूप में मनाया जाता है। जब 1947 में महाराजा हरि सिंह ने जम्मू और कश्मीर को भारत में विलय करने वाले विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। भारत के इतिहास में विलय दिवस की गाथा ने विशेष स्थान बनाया है। इस अहम दिन को याद रखते हुए हर साल 26 अक्तूबर को विलय दिवस मनाया जाता है।

जानें इतिहास

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 78 साल पहले आज के ही दिन जम्मू-कश्मीर भारत में विलय हुआ था। जम्मू-कश्मीर के महाराजा हरी सिंह ने विलय संधि पर हस्ताक्षर किए। इतिहासकारों के अनुसार 24 अक्तूबर, 1947 को कबाइलियों ने रियासत पर ताबड़तोड़ हमले किए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक मुठभेड़ के दौरान सेना के कई जवान शहीद हुए थे, लेकिन ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह ने हार नहीं मानी और गोली लगने के बाद भी भूखे-प्यासे दुश्मनों का सामना करते रहे। तीसरे दिन उन्होंने दम तोड़ दिया था। हरी सिंह 25 अक्टूबर को श्रीनगर छोड़कर जम्मू पहुंच गए। यहां उन्होंने भारत में शामिल होने का फैसला किया। 26 अक्टूबर को हरी सिंह ने भारत के विलय पत्र ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ पर हस्ताक्षर किए। इसके अगले ही दिन भारतीय सेना श्रीनगर पहुंची और कबायलियों को खदेड़ दिया। अब समूचा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बन चुका था।

केन्द्र से मांगी थी मदद

जम्मू-कश्मीर रियासत को कबाइलियों से बचाने के लिए महारजा हरि सिंह ने केंद्र सरकार की मदद मांगी थी। तब की सरकार ने महाराजा के साथ विलय करने की शर्त रखी। 26 अक्तूबर, 1947 को विलय होते ही भारतीय सेना ने घाटी के सीमांत क्षेत्रों में पहुंचकर बिगड़ी स्थिति पर काबू पाया था। तब से जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग बना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ इतिहासकार ये भी कहते हैं कि हरी सिंह ने श्रीनगर छोड़ने से पहले ही विलय संधि पर हस्ताक्षर कर दिए थे।

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