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पिथौरागढ़: 22 साल में पांच साल ही चला महिला जनप्रतिनिधि का जादू… महिला विधायक की संख्या हुई शून्य

पिथौरागढ़ जनपद की राजनीति में एक बार फिर महिला जनप्रतिनिधि की भागीदारी शून्य हो गई है। कुछ माह पूर्व तक दो-दो महिला विधायक वाले सीमांत में अब एक भी महिला जनप्रतिनिधि नहीं रही। दोनों ही सीटिंग विधायक प्रदेश की पांचवीं सरकार से बाहर हो गई हैं।

सीटिंग विधायक को विधानसभा पहुंचने का दुबारा नहीं मिला मौका:

एक को पार्टी ने टिकट न देकर पहले ही चुनाव की दौड़ से बाहर कर दिया तो वहीं दूसरी महिला सीटिंग विधायक को जनता ने स्वीकारा नहीं। अब चारों सीटों पर पुरुष जनप्रतिनिधियों का ही दबदबा रहेगा।

महिलाओं को जीत नसीब नहीं हुई:

प्रदेश गठन के बाद विधानसभा का पांचवा चुनाव संपन्न हो गया है। लेकिन सीमांत की महिला जनप्रतिनिधियों के लिए अधिकतर चुनाव कुछ खास साबित नहीं हुए हैं। वर्ष 2002 में हुए पहले चुनाव से ही महिलाएं, विधायक बनने को पुरुष जनप्रतिनिधियों के साथ चुनाव मैदान में खड़ी हुई, लेकिन उन्हें जीत नसीब नहीं हुई।

मीना गंगोला को पार्टी ने तो चंद्रा को जनता ने दिखाया बाहर का रास्ता:

वर्ष 2017 में गंगोलीहाट सीट से महिला प्रत्याशी मीना गंगोला पहली बार चुनाव जीतने में कामयाब हुई। गंगोला जनपद की पहली महिला बनीं जो विधानसभा पहुंची। वर्ष 2019 में पूर्व काबीना मंत्री प्रकाश पंत के निधन के बाद उनकी पत्नी पिथौरागढ़ विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ी और जीत दर्ज करनें में सफल रही। बीते तीन सालों से जनपद दो पुरुष व दो महिला विधायक प्रतिनिधित्व कर रहे थे, लेकिन गुरुवार को विस चुनाव 2022 की मतगणना के बाद महिला जनप्रतिनिधि की संख्या शून्य हो गई है। मीना गंगोला को पार्टी ने तो चंद्रा को जनता ने दिखाया बाहर का रास्ता।

जनता ने महिला प्रत्याशी को फिर नाकारा, चार सीटों में 4 महिलाएं थीं मैदान में:

इस बार चुनाव में चारों सीट से 4 महिला जनप्रतिनिधि मैदान में उतरी। इनमें पिथौरागढ़ सीट से भाजपा प्रत्याशी चंद्रा पंत, गंगोलीहाट से आप प्रत्याशी बबीता चंद्र, इसी सीट से बसपा प्रत्याशी रेखा व धारचूला सीट से सपा प्रत्याशी मंजू देवी ने चुनाव लड़ा। लेकिन चारों ही चुनाव हार गई हैं।

पांच साल की हरियाली के बाद फिर सूखा:

पिथौरागढ़ की सीमांत की राजनीति में पांच साल की हरियाली के बाद महिला जनप्रतिनिधियों के लिए फिर सूखा पड़ गया है। 15 वर्ष के संघर्ष के बाद महिला जनप्रतिनिधि का खाता खुला और एक महिला जीतकर विधानसभा पहुंची।

महिला विधायक की संख्या हुई शून्य:

फिर दो साल के अंतराल के बाद इसमें एक से संख्या बढ़कर दो हो गई, लेकिन महिला विधायक की यह संख्या शून्य हो गई है।

अब तक 7 विधानसभा चुनावों में 19 महिलाएं मैदान में उतरी:

पिथौरागढ़ में राज्य गठन के बाद से लगातार महिला जनप्रतिनिधि विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रही हैं। अब तक हुए पांच सामान्य और दो उपचुनाव सहित सात विधानसभा चुनावों में कुल 19 महिला जनप्रतिनिधियों ने चुनाव लड़ा है।

कुल 19 महिला जनप्रतिनिधियों ने लड़ा चुनाव:

वर्ष 2002 में पहली बार चार महिलाएं विधायक बनने को मैदान में उतरी। पांच साल बाद एक संख्या घटकर तीन हो गई। वहीं 2012 और 2017 के विस चुनाव में तीन-तीन महिलाओं ने ही चुनाव लड़ा।

इस बार चार महिलाएं मैदान में उतरी:

वर्ष 2019 उपचुनाव में दो महिलाओं के बीच मुकाबला हुआ। वहीं इस बार चुनाव में चार महिलाओं ने अपनी किस्मत आजमाई।

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