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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन नये आपराधिक कानून विधेयकों को दी मंजूरी


देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। संसद के शीतकालीन सत्र में हाल में पारित हुए तीन नये आपराधिक कानून विधेयकों को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है। इन तीन बिल में “अंग्रेजों के समय का राजद्रोह कानून खत्म किया गया है। नाबालिग से रेप और मॉब लिंचिंग जैसे क्राइम में फांसी की सजा दी जाएगी।”

राष्ट्रपति ने दी मंजूरी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 25 दिसम्बर को राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने तीनों नए क्रिमिनल लॉ बिल को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही इन तीनों बिल भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य बिल ने कानून का रूप ले लिया है। तीन नए कानून-  भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य कानून औपनिवेशिक काल के तीन कानूनों भारतीय दंड संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लेंगे। ऐसे में अब भारतीय दंड संहिता को भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता से, दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) को भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता से और भारतीय साक्ष्य अधिनियम को भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) संहिता से बदल जाएगा।

लोकसभा और राज्यसभा से भी हुए थे पास

दरअसल बीते बुधवार 20 दिसम्बर को आपराधिक कानूनों से जुड़े तीन बिल लोकसभा में से पास हुए। जिसके बाद इसे राज्यसभा में रखा गया। राज्यसभा ने आईपीसी, सीआरपीसी और साक्ष्य अधिनियम की जगह तीन आपराधिक विधेयक – भारतीय न्याय (द्वितीय) संहिता, 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा (द्वितीय) संहिता, 2023 और भारतीय साक्ष्य (द्वितीय) विधेयक, 2023 पारित किए। ये तीनों विधेयक भारतीय दंड संहिता-1860, दंड प्रक्रिया संहिता अधिनियम-1898 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की जगह लेंगे।


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