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उत्तराखंड बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों को मिलेगी राहत: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर समय से पहले होगी रिहाई, तैयार हो रही नई रिहाई नीति

​उत्तराखंड: जेलों में बंद बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार कैदियों के लिए एक राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद राज्य सरकार और जेल प्रशासन ने ऐसे कैदियों की समय से पहले रिहाई की प्रक्रिया को तेज कर दिया है।

स्पष्ट नीति अधिसूचित करने के निर्देश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय गरिमा और संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का हवाला देते हुए सभी राज्यों को तीन महीने के भीतर इस संबंध में एक स्पष्ट नीति अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण और राज्य सरकार मिलकर नई रिहाई नीति का खाका तैयार कर रहे हैं। जिसमें कैदियों के स्वास्थ्य का निष्पक्ष आकलन करने के लिए मंडल और राज्य स्तर पर विशेष मेडिकल बोर्ड बनाए जाएंगे। यह बोर्ड कैदियों की शारीरिक स्थिति और बीमारियों की जांच कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। जिन मामलों में सरकार की ओर से रिहाई की सिफारिश नहीं की जाएगी, वहां जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (DLSA) कैदियों की तरफ से अदालत में जमानत या रिहाई की अर्जी दाखिल करेगा।


​करना होगा दाखिल

​उत्तराखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत उठाए गए कदमों, चिन्हित किए गए कैदियों और रिहा किए गए कैदियों के आंकड़ों के साथ छह महीने के भीतर अनुपालन हलफनामा दाखिल करना होगा। गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए शासन स्तर पर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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