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रुद्रप्रयाग: जिला अस्पताल में डॉक्टरों का अकाल: ‘रेफर सेंटर’ बनने को मजबूर, 37 पद स्वीकृत पर विशेषज्ञ नदारद, मरीज परेशान

​रुद्रप्रयाग: जिले के मुख्य जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी के चलते स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। यहां अस्पताल में इलाज न मिल पाने के कारण मरीजों को छोटी-बड़ी बीमारियों के लिए भी श्रीनगर रेफर करना पड़ रहा है, जिससे यह अस्पताल केवल एक ‘रेफर सेंटर’ बनकर रह गया है।

मरीज परेशान

इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल में डॉक्टरों के कुल 37 पद स्वीकृत हैं। इनमें से वर्तमान में केवल मेडिसिन, बाल रोग (पीडियाट्रिक), फिजिशियन और स्त्री एवं प्रसूति रोग (गायनी) की ही ओपीडी किसी तरह संचालित हो पा रही है। वहीं, सर्जरी, हड्डी रोग (ऑर्थोपेडिक), नेत्र रोग और ईएनटी (नाक, कान, गला) जैसे अति-महत्वपूर्ण विभागों में डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं हैं। इन बीमारियों के मरीजों को देखते ही सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

पड़ रहा अतिरिक्त बोझ

अस्पताल में सिर्फ डॉक्टरों की ही कमी नहीं है, बल्कि नर्सिंग व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। जानकारी सामने आई है कि अस्पताल के 6 नर्सिंग अधिकारी बाहर अटैच (संबद्ध) हैं, जबकि उनका वेतन रुद्रप्रयाग जिला अस्पताल से ही निकाला जा रहा है। मूल अस्पताल में स्टाफ की कमी होने के बावजूद इस तरह के अटैचमेंट से मौजूद नर्सिंग स्टाफ पर काम का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।

​स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहाड़ों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर जिला अस्पताल खुद ‘बीमार’ पड़ा है। लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि नर्सिंग अधिकारियों का अटैचमेंट तुरंत रद्द किया जाए और अस्पताल में खाली पड़े विशेषज्ञ डॉक्टरों के पदों पर शीघ्र तैनाती की जाए ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

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