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दुखद: उत्तराखंड में जन्मे ‘गोल्डन बॉय’ जसपाल राणा का 49 वर्ष की उम्र में निधन, खेल जगत में शोक की लहर

खेल जगत से जुड़ी दुखद खबर सामने आई है। भारतीय निशानेबाजी के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है। देश के दिग्गज शूटर और ‘गोल्डन बॉय’ के नाम से मशहूर जसपाल राणा का शुक्रवार सुबह दिल्ली के मैक्स साकेत अस्पताल में निधन हो गया है।

जसपाल राणा का निधन

उन्होंने 49 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) ने इस दुखद खबर की पुष्टि की है। उनके आकस्मिक निधन से पूरे खेल जगत, उत्तराखंड और देश में शोक की लहर दौड़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जसपाल राणा की तबीयत बीते 1 जून को उस समय अचानक बिगड़ गई थी, जब वे जर्मनी के म्यूनिख से भारत लौट रहे थे। फ्लाइट में स्वास्थ्य खराब होने के बाद दिल्ली पहुंचते ही उन्हें तुरंत मैक्स साकेत अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में चिकित्सा जांच के बाद उनकी धमनियों में एक स्टेंट डाला गया था। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही थी, लेकिन शुक्रवार सुबह उनकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई। तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके।

उत्तराखंड में हुआ जन्म

28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में जन्मे जसपाल राणा मूल रूप से नैनबाग चिलामू के रहने वाले थे। उनके पिता नारायण सिंह राणा भारतीय सेना (आर्मी) में थे और उन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध में हिस्सा लिया था। इसके बाद उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में सेवाएं दीं और साल 2000 में उत्तराखंड की अंतरिम सरकार में पहले खेल मंत्री बने। जसपाल राणा का पूरा परिवार ही निशानेबाजी को समर्पित रहा। उनकी बहन सुषमा सिंह (राणा) और भाई सुभाष राणा भी देश के बेहतरीन शूटरों में शुमार हैं। जसपाल राणा ने महज 18 साल की उम्र में साल 1994 के हिरोशिमा एशियाई खेलों में 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इतिहास रचा था। साथ ही एशियाई खेलों के अलावा राष्ट्रमंडल खेलों में भी उन्होंने भारत के लिए कई स्वर्ण और अन्य पदक जीतकर तिरंगा बुलंद किया।
▪ 1995 चेन्नई SAF खेल: एक ही संस्करण में रिकॉर्ड 8 स्वर्ण पदक जीते।
▪ ​1999 काठमांडू SAF खेल: अपने पिछले प्रदर्शन को दोहराते हुए फिर से 8 स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

मनु भाकर के कोच में आए चर्चा में

जसपाल राणा न सिर्फ एक महान खिलाड़ी थे, बल्कि एक बेहतरीन मार्गदर्शक भी थे। हाल के दिनों में वे देश की स्टार निशानेबाज मनु भाकर के कोच के रूप में लगातार चर्चा में थे। उनकी देखरेख में ही मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक में दो ऐतिहासिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। वे भारतीय जूनियर टीम के कोच और हाई परफॉर्मेंस ट्रेनर थे। फरवरी 2025 में ही उन्हें राष्ट्रीय 25 मीटर पिस्टल टीम का मुख्य कोच बनाया गया था।

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