आज 02 सितंबर 2026 है। आज बलराम जयंती है। जिसे हल षष्ठी भी कहते है। हल षष्ठी (जिसे हल छठ, हरछठ या ललही छठ भी कहते हैं) संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू व्रत है। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था। उनका शस्त्र हल है और षष्ठी तिथि को जन्म हुआ तो इस दिन को हल षष्ठी या हल छठ कहते हैं। इस जयंती को अलग-अलग जगहों पर पीन्नी छठ, खमर छठ, राधन छठ, चंदन छठ, तिनछठी, ललही छठ और हरछठ के नाम से जाना जाता है।
जानें शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि 2 सितंबर को सुबह 6 बजकर 12 मिनट पर प्रारंभ होगी और 3 सितंबर को प्रात: 4 बजकर 25 मिनट पर खत्म होगी। सूर्योदय की तिथि के अनुसार, हल छठ या हल षष्ठी 2 सितंबर बुधवार को है।
📌📌हल छठ के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं। सबसे पहले ध्रुव योग प्रात:काल से लेकर रात 09 बजकर 12 मिनट तक रहेगा, उसके बाद से व्याघात योग बनेगा और पूरी रात तक रहेगा।
📌📌वहीं रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग मध्य रात्रि सुबह 01:43 से लेकर 3 सितंबर को सुबह 06:00 बजे तक रहेगा। हल छठ पर भरणी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर 3 सितंबर को सुबह 01:43 तक है।
जानें महत्व
बलराम जयंती भगवान बलराम के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य के रूप में मनाई जाती है। मान्यताओं के मुताबिक इस दिन जो भी महिलाएं व्रत करती है, उन्हें संतान सुख की प्राप्ति होती है। बलराम जयंती पर विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से संतान की आयु लंबी होती है।