आज 02 सितंबर 2026 है। आज रांधण छठ है। जो मुख्य रूप से गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में मनाया जाने वाला एक पारंपरिक त्योहार है, जो शीतला सातम से एक दिन पहले श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।
खास है महत्व
इस दिन महिलाएं अगले दिन (शीतला सातम) के लिए सारा भोजन सूर्य अस्त होने से पहले ही बना लेती हैं। खाना बनाने के बाद गैस चूल्हे, चूल्हे या सिगड़ी की पूजा की जाती है क्योंकि अगले दिन रसोई में नई आग नहीं जलाई जाती। शीतला सातम के दिन घर में ताजा खाना नहीं बनता है, और परिवार के सभी लोग रंधन छठ के दिन का बना हुआ ठंडा और एक दिन पुराना भोजन ही खाते हैं। यह त्योहार शीतला माता को समर्पित है। मान्यता है कि इससे परिवार को स्वास्थ्य लाभ मिलता है और चेचक, खसरा जैसी बीमारियों से रक्षा होती है। साथ ही, यह महिलाओं को रसोई के काम से एक दिन का विश्राम देने का भी प्रतीक है।
रांधण छठ संतान का योग
रांधण छठ का व्रत विशेष रूप से संत के कल्याण के लिए किया जाता है। अपने संत की लंबी उम्र की कामना के साथ इस व्रत को लिखा जाता है। इस व्रत को करके संतान सुख प्राप्त करें। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन माताएं अपनी संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना से हलछठ व्रत की कहानियां बताती हैं। इसी दिन श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम का भी जन्म हुआ था।