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चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर मद्रास हाईकोर्ट का चौंकाने वाला फैसला, इस आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, जानें

देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए‌ है। चाइल्ड पोर्नोग्राफी को देखना क्राइम है। साथ ही इसके लिए 7 साल तक की सजा का भी प्रावधान है।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी एक क्राइम

चाइल्ड पोर्नोग्राफी एक क्राइम है जिसमें बच्चे का यौन आग्रह या नाबालिग (Minor) की भागीदारी वाली अश्लील सामग्री का निर्माण शामिल है। साथ ही बच्चों से जुड़ी गलत गतिविधियों को रिकॉर्ड करना, एमएमएस (MMS) बनाना, दूसरों को भेजना आदि भी इसके तहत आते हैं। भारतीय कानून व्यवस्था के मुताबिक, चाइल्ड पोर्नोग्राफी की इमेज बनाना, उसको शेयर करना गैरकानूनी है। इसके अलावा, चाइल्ड पोर्न कंटेंट रखना और देखना भी अपराध है।

मद्रास हाईकोर्ट ने सुनाया था यह फैसला

इससे जुड़ी एक खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिसमें चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर मद्रास हाईकोर्ट ने इस साल जनवरी में पारित अपने फैसले में कहा था कि बाल पोर्नोग्राफी डाउनलोड करना POCSO या सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपराध नहीं है क्योंकि ऐसा कार्य बिना किसी को प्रभावित या गोपनीयता में किया जाता है‌। हाईकोर्ट ने 28 वर्षीय एक व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही रद्द कर दी थी। जिस पर अपने मोबाइल फोन में चाइल्ड पोर्नोग्राफी डाउनलोड करने का आरोप लगाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी आपत्ति

हाईकोर्ट के इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तमिलनाडु पुलिस और आरोपी को नोटिस भी जारी किया है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये क्रूर है। मद्रास हाई कोर्ट ऐसा फैसला कैसे ले सकता है?”

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