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श्री नंदा देवी लोकजात यात्रा 2026: होमकुंड में गूंजे मां के जयकारे, संपन्न हुई नंदा देवी बड़ीजात 2026, नंदा भक्तों की आंखें हुईं नम

हरेंद्र बिष्ट / महिपाल गुसाईं
थराली / गोपेश्वर: हिमपर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी और पंचगंगा के संगम पर स्थित अपार श्रद्धा के केंद्र होमकुंड में बड़ीजात पूजा (विशेष अनुष्ठान) के संपन्न होने के साथ ही श्री नंदा देवी लोकजात यात्रा 2026 के मुख्य धार्मिक अनुष्ठान पूरे हो गए हैं।

चौसिंगा खांडुओं को दी विदाई

जिसमें चौसिंगा खांडुओं को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सजा-धजा कर कैलाश विदाई दी गई। इसके साथ ही यात्रा अब अपने वापसी पथ पर श्री नंदादेवी सिद्धपीठ कुरूड़ (नंदानगर) के लिए प्रस्थान कर चुकी है। जानकारी के अनुसार आज रविवार तड़के यात्रियों ने 16वें और तीसरे निर्जन पड़ाव शीला समुद्र में स्नान किया। इसके बाद दशोली, बंड और ज्वाल्पा की नंदा देवी की डोलियों, छतौलियों व चौसिंगा खांडुओं के साथ त्रिशूली और नंदा घुंघटी की तलहटी में स्थित होमकुंड पहुंचे।

होमकुंड में उमड़ा आस्था का जनसैलाब

खुशनुमा मौसम के बीच होमकुंड पहुंचने पर नंदा देवी सिद्धपीठ के पुजारियों (मुंशी राम गौड़, दिनेश गौड़, प्रकाश गौड़, उमेश गौड़, नवीन गौड़, प्रवीण गौड़ व बंड डोली अध्यक्ष अशोक गौड़) ने भगवती की विशेष पूजा-अर्चना कराई। श्री नंदादेवी बड़ीजात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत, कुरूड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखबीर सिंह रौतेला सहित समिति के पदाधिकारियों और हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने अनुष्ठानों में भाग लिया। पूजा के दौरान कई नंदा भक्तों पर माता नंदा और अन्य देवी-देवता अवतरित हुए, जिन्होंने नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।

कैलाश विदाई पर नम हुई श्रद्धालुओं की आंखें

अनुष्ठान के बाद यात्रा के साथ चल रहे तीन चौसिंगा खांडुओं को विशेष रूप से सजाया गया। उनकी पीठ पर माता की भेंट, कलैऊ, प्रसादी, फल-फूल और श्रृंगार सामग्री बांधी गई। मंत्रोच्चार और मां नंदा के जयकारों के बीच खांडुओं को कैलाश की ओर विदा किया गया। इस भावुक क्षण में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। होमकुंड में पूजा संपन्न होने के बाद यात्रा अपने 17वें और चौथे निर्जन पड़ाव जामुन डाली पहुंच गई है। भोजपत्र और रिंगाल के घने जंगलों को पार करते हुए चंदनियाघट के रास्ते यात्री जामुन डाली पहुंचे, जहां रात्रि प्रवास और देवी जागरण का आयोजन किया गया। कुछ यात्रियों ने लाट खोपड़ी और तातणा में भी विश्राम किया।

यहां करेगी प्रवेश

कल सोमवार को यात्रा निर्जन पड़ाव छोड़कर पुनः आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करेगी। 23 सितंबर को नंदा की डोलियां सिद्धपीठ कुरूड़ पहुंचेंगी, जहां यज्ञ-अनुष्ठान के साथ इस ऐतिहासिक यात्रा का विधिवत समापन होगा।

​बधाण की श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी डोली पंहुची उलंग्रा

​वहीं बधाण की श्री नंदादेवी राजराजेश्वरी की उत्सव डोली अपने सिद्धपीठ देवराड़ा (थराली) की वापसी यात्रा के तहत तीसरे पड़ाव उलंग्रा गांव पहुंच गई है। आज रविवार को डोली ल्वाणी से प्रस्थान कर कांडे और बमणबेरा होते हुए देर शाम उलंग्रा पहुंची, जहां ग्रामीणों ने ढोल-दमाऊ के साथ भव्य स्वागत किया और रात्रि जागरण का आयोजन किया।

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