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पलायन रोकने के लिए खास पहल की तैयारी: धामी सरकार की ‘प्रवासी पंचायत’ से आबाद होंगे उत्तराखंड के सूने गाँव

उत्तराखंड: उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों से पलायन की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है।

यह खास तैयारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ‘उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग’ अब प्रदेश भर में ‘प्रवासी पंचायतों’ का आयोजन करने जा रहा है, जिसका उद्देश्य शहरों में बसे प्रवासियों को पुनः अपने गाँवों की ओर आकर्षित करना और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। इस मुहिम की शुरुआत आगामी 24 अप्रैल को टिहरी जिले से होने जा रही है। योजना के अनुसार, नवंबर 2026 तक प्रदेश के सभी जिलों में इन पंचायतों का आयोजन पूरा कर लिया जाएगा। इन सम्मेलनों में उन प्रवासियों को ‘रोल मॉडल’ के रूप में बुलाया जाएगा, जो शहर छोड़कर वापस आए और अब गाँवों में सफल व्यवसाय चला रहे हैं।

रिवर्स पलायन के उत्साहजनक आँकड़े

​रिपोर्ट्स के मुताबिक पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी ने बताया कि पिछले चार वर्षों में राज्य में सकारात्मक बदलाव दिखे हैं। 6,000 से अधिक लोग अब तक ‘रिवर्स पलायन’ कर अपने गाँवों को लौट चुके हैं। ये लोग खेती, बागवानी, मधुमक्खी पालन, डेयरी और होमस्टे जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन रहे हैं।सरकार अब जिला स्तर पर विभागीय अधिकारियों के माध्यम से नई स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी सीधे प्रवासियों तक पहुँचाएगी। साथ ही सरकार का मानना है कि केवल भावना के आधार पर नहीं, बल्कि सुविधाओं के दम पर पलायन रुकेगा। इस संबंध में एस.एस. नेगी, उपाध्यक्ष (पलायन निवारण आयोग) ने बताया कि पहाड़ों को फिर से बसाना और संवारना हमारी प्राथमिकता है। लोग अब अपने गाँवों की ओर लौट रहे हैं और हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उन्हें वहाँ हर जरूरी सुविधा मिले।

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