देश दुनिया की खबरों से हम आपको रूबरू कराते रहते हैं। एक ऐसी खबर हम आपके सामने लाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सड़क दुर्घटना में अपना दाहिना पैर गंवाने वाले एक लकड़हारे को बड़ी राहत दी है।
लकड़हारे को बड़ी राहत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने लकड़हारे के मुआवजे की राशि में भारी बढ़ोतरी की है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि अदालतों को केवल चिकित्सा प्रमाण-पत्रों के आंकड़ों पर नहीं, बल्कि पीड़ित की आजीविका और उसकी ‘कार्यात्मक विकलांगता’ पर पड़ने वाले प्रभाव को गंभीरता से देखना चाहिए।
जानें क्या है पूरा मामला
यह मामला 9 नवंबर 2004 का है। उत्तराखंड के रहने वाले शंकर दत्त (उस समय 38 वर्ष) एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे, जब एक जीप ने उनकी मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में उन्हें इतनी गंभीर चोटें आईं कि उनका दाहिना पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। वे करीब 43 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे। इस मामले में निचली अदालत (MACT) ने 2012 में 4.77 लाख रुपये का मुआवजा दिया था, जिसे बाद में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बढ़ाकर 11.51 लाख रुपये कर दिया था। इस फैसले से असंतुष्ट होकर शंकर दत्त ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
कोर्ट का आदेश
जिस पर जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन.वी. अंजरिया की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यद्यपि चिकित्सा रिपोर्ट में विकलांगता 70 प्रतिशत थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि लकड़हारे के काम में शारीरिक चपलता और गतिशीलता अनिवार्य है। अतः उनकी कार्यात्मक विकलांगता को 100 प्रतिशत माना जाना चाहिए। कोर्ट ने हाईकोर्ट द्वारा तय की गई 5,000 रुपये मासिक आय को कम मानते हुए इसे बढ़ाकर 9,000 रुपये किया, क्योंकि लकड़हारी एक कुशल पेशा है।
बीमा कंपनी को दिए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कुल मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 35.95 लाख रुपये कर दिया है। पीठ ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया है कि वह अंतर की राशि (लगभग 24.44 लाख रुपये) 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ छह सप्ताह के भीतर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) में जमा करे।