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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, हल्द्वानी में बनेगा उत्तराखंड का नया हाईकोर्ट, सरकार को इतने हफ्ते में जमीन सौंपने का आदेश

उत्तराखंड: उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी स्थानांतरित करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बेहद अहम फैसला सुनाते हुए आदेश जारी कर दिए है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

सर्वोच्च अदालत ने उत्तराखंड सरकार को निर्देश दिया है कि वह हल्द्वानी में नई हाईकोर्ट बिल्डिंग के निर्माण के लिए 6 हफ्ते के भीतर जमीन का कब्जा सौंपे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को इस संबंध में जल्द नोटिफिकेशन (अधिसूचना) जारी करने के भी निर्देश दिए हैं।इस संबंध में सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट के साल 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें राज्य सरकार से नैनीताल के बाहर नई इमारत के लिए सबसे बेहतर जमीन तलाशने को कहा गया था। सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए साफ किया कि बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों को न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर सुलझाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट को ऐसे (जमीन तलाशने के) आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसे मुद्दों पर न्यायिक कार्यवाही में विचार नहीं किया जा सकता। उत्तराखंड हाईकोर्ट को प्रशासनिक स्तर पर राज्य सरकार के साथ मिलकर बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों का समाधान करना चाहिए।

​दिए यह निर्देश

सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड हाईकोर्ट की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) केएम नटराज ने पीठ को बताया कि राज्य सरकार ने नई इमारत के लिए हल्द्वानी में जमीन निर्धारित कर ली है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सरकार द्वारा चिह्नित की गई इस जमीन को सभी आवश्यक मंजूरियों के साथ ‘जैसा है, जहां है’ के फॉर्मूले पर 6 हफ्ते के भीतर हाईकोर्ट को सौंप दिया जाए, ताकि निर्माण प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू हो सके।
​बार एसोसिएशन ने दी थी चुनौती

​गौरतलब है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पहले मुख्य सचिव को एक महीने के भीतर सबसे उपयुक्त जमीन तलाशने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कानूनी रूप से गलत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए यह नया आदेश जारी किया है।
​लिया यह फैसला

​उत्तराखंड राज्य की स्थापना के बाद 9 नवंबर, 2000 से हाईकोर्ट नैनीताल से ही काम कर रहा है। हालांकि, समय के साथ यहां बुनियादी ढांचे और जगह की भारी कमी महसूस होने लगी है। हाईकोर्ट ने अपने पिछले आदेश में भविष्य की जरूरतों का खाका खींचते हुए कहा था कि राज्य गठन के समय जजों की संख्या केवल 3 थी, जो अब बढ़कर 11 हो चुकी है। अगले 50 सालों में यह संख्या 8 गुना बढ़कर 80 होने की संभावना है। भविष्य में 80 जजों, न्यायिक अधिकारियों, स्टाफ के लिए रिहायशी आवास, आधुनिक कोर्ट रूम और कॉन्फ्रेंस हॉल की जरूरत होगी। परिसर में कम से कम 7,000 वकीलों के लिए चैंबर, कैंटीन और बड़े पार्किंग स्पेस की आवश्यकता होगी, जो नैनीताल की भौगोलिक स्थिति में संभव नहीं हो पा रहा था।

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