October 17, 2021

अदिति महाविद्यालय में ऑनलाइन विशेष व्याख्यान श्रृंखला में ‘सोशल मीडिया: कुछ अनछुए पहलू’ विषय पर हुई वार्ता

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कोरोनाकाल में शिक्षण और प्रशिक्षण को विशेष गति प्रदान करने के लिए प्रोफेसर माला मिश्रा ने छात्रों के बौद्धिक औऱ शैक्षिक संवर्धन बहुत सुंदर और सार्थक शुरुआत की है। अदिति महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग द्वारा चलाई जा रही ऑनलाइन विशेष व्याख्यान श्रृंखला के तहत डिजाइन इन्नोवेशन सेंटर यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली के श्री शशि पाठक ने ‘सोशल मीडिया: कुछ अनछुए पहलू’ विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान दिया।

सोशल मीडिया के कुछ अनछुए पहलू :

श्री शशि पाठक ने कहा कि हमारे चारों तरफ सोशल मीडिया का जाल फैला हुआ है। सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म हैं। उन प्लेटफ़ॉर्म  के सहारे हम सभी समाज से जुड़े रहे है। इन प्लेटफॉर्म में लिंकडइन, ट्विटर आदि प्रोफेशनल कार्यों के लिए और  फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम आदि सामान्य इंट्रक्शन के लिए प्रयोग की जा रही है। सोशल मीडिया समाज से जुड़ने के लिए आवश्यक है। तमाम देशों के लोगों का दृष्टिकोण इसके सहारे हमारे सामने आता है। हम उन दृष्टिकोण को जानने-समझते हैं और हम लोग इन सभी विचारों से जुड़कर लाभ लेते हैं। सोशल मीडिया में हम ऑडियो, वीडियो, फोटो, टेक्स्ट आदि किसी भी फॉर्मेट में प्रयोग कर सकते हैं। यह बहुत बड़ी आजादी हमको मिली हुई है।

हम किसी न किसी रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से डाटा जेनरेट करते हैं

हम साहित्य, राजनीति, खेल, फैशन, कला आदि क्षेत्रों से जुड़कर लाभ ले रहे हैं। यह सोशल मीडिया के फायदे हैं। उन्होंने कहा कि अब डेटा ऑब्जेक्ट बन चुका है। यह तेल से भी ज्यादा महंगा महंगा हो गया है। हमारे हर तरफ डाटा जनरेट हो रहा है। यह आज के समय में एक कीमती वस्तु बन गया है। समाज के निम्न पायदान पर बैठा हुआ व्यक्ति भी डाटा जनरेट करता है। उसका भी डेटा कीमती हो सकता है। सोशल मीडिया पर वो देता भी संग्रहित हो जाता है। उस डेटा का प्रयोग भी अपने विचारों को बढ़ाने में हम कर सकते हैं। हर कोई इस डेटा को बढ़ाने में योगदान दे रहा है। हम किसी न किसी रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से डाटा जेनरेट करते हैं और उस डाटा का प्रयोग कंपनियां, औद्योगिक संस्थान और यह अन्य प्रोफेशनल्स  करते हैं। सामाजिक मीडिया पर  हम भरोसा करने लगे हैं। हमारा  डेटा के रूप में डाली गई सामग्री,विचार आदि का इस्तेमाल ये साइटें कर रही हैं। हम  भी इसका प्रयोग किसी न किसी रूप से करते हैं। अपने कौशल को विकसित करने, अपने अनुभवों को बढ़ाने, अपने व्यवसाय की उन्नति के लिए इसका प्रयोग हम कर रहे हैं। यहां तक कि इस डेटा से हम पैसा कमा रहे हैं।
हम दूसरे के आईडिया का भी प्रयोग कर रहे हैं। हमारा डाटा बिक रहा है। हम जो भी सोशल मीडिया में लिख रहे हैं वह डाटा ही है और वह किसी न किसी रूप से बिक रहा है। हमारे विचार बिक रहे हैं। सोशल मीडिया में आने से जो हम विचार साझा करते हैं वह किसी न किसी रूप से समाज को प्रभावित करते हैं और समाज उनका लाभ ले रहा है। एक तरीके से वस्तु के रूप में बिक रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमारा डेटा का प्रयोग फेसबुक कर रहा है। फेसबुक  चिन्हित लोगों को उनकी रुचि के अनुसार डेटा दिखा सकता है, भेज सकता है।  फेसबुक भी हमारी रूचि के अनुसार हमें वही सामग्री दिखाता है जिसको हम अत्यधिक पसंद करते हैं, या हमने विगत समय में जिसको सबसे ज्यादा देखा है,वह उससे जुड़ी सामग्री को हमारे सामने प्रस्तुत करता है।  फेसबुक पर हम जिस कंटेंट को सबसे ज्यादा देखते हैं तो फेसबुक हमें उसी कंटेंट से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराता है।  वह हमारी इच्छा के अनुसार डाटा को हमारे सामने लाता है । इससे एक तरफ फेसबुक और दूसरी तरफ उस सामग्री जुड़े लोग फायदा लेते हैं।

सोशल मीडिया हमारी मानसिकता को भी प्रभावित कर रहा है।

हम फेसबुक को स्क्रॉल करके भी कंपनियों को लाभ पहुंचाते हैं, और  फेसबुक को लाभ पहुंचाते हैं।
सोशल मीडिया हमारी मानसिकता को भी प्रभावित कर रहा है। यह लोगों को इनफ्लुएंस करता है। सोशल मीडिया  सही व गलत के रूप में यहां प्रस्तुत होता है। बड़ी बड़ी  कंपनियां, राजनीतिज्ञ लोग भी इसका लाभ ले रहे हैं और लोगों को जोड़ने में वह इसका प्रयोग कर रहे हैं। हम सोशल मीडिया में यदि हम खाली स्क्रॉल भी करें तो हम यह समझें कि हम  डेटा बना रहे हैं। हालिया वर्षों में अमेरिका ने उस  डेटा को खरीद कर फायदा लिया।

बिना सोचे समझे फेसबुक या सोशल मीडिया में कुछ भी ना डालें।

हम बिना सोचे समझे फेसबुक या सोशल मीडिया में कुछ भी ना डालें। यदि वह सामग्री किसी ताकतवर लोगों के हाथ में पड़ गया तो वह उसका फायदा उठा सकते हैं। डेटा के इस फैलाव को रोकना होगा। हमें अपने मित्रों की आदतों को सुधारना होगा। हमें अपने मित्रों को समझाना चाहिए हमें सोशल मीडिया में इतना अधिक पब्लिक होने की जरूरत नहीं है।
इससे पूर्व अदिति महाविद्यालय की प्रोफ़ेसर माला मिश्रा ने विशेषज्ञ वक्ता का स्वागत किया और  कहा कि सोशल मीडिया आज के समय में बहुत प्रासंगिक है। इस पर चिंतन होना आवश्यक है।

व्याख्यानमाला में इतने लोग हुए शामिल

इस व्याख्यानमाला में प्रतिभा शाह, कामना, मोनिका सैनी, पूजा, प्राची गुलियानी, प्रज्ञा शिखा, रचना कुमारी, श्वेता सिंह, भावना, हनी, शत्रुघ्न पाठक, आर.जे.दृष्टि, संजना सिंह, किरण कुमारी, अनुजा मिश्रा एवं सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के शिक्षक डॉ ललित चंद्र जोशी आदि सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।