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आईजीआईएमएस पटना में पहली बार हुई बिना ओपन हार्ट सर्जरी वाल्व बदलने की ‘TAVI’ प्रक्रिया, बुजुर्ग को मिला नया जीवन

पटना: इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (IGIMS), पटना ने कार्डियक केयर (हृदय रोग इलाज) के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है।

किया सफल ऑपरेशन

यहां संस्थान के कार्डियोलॉजी विभाग ने बिना ओपन-हार्ट सर्जरी के कैथेटर के जरिए दिल का वाल्व बदलने की जटिल TAVI (ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन) प्रक्रिया का पहला सफल ऑपरेशन किया है। यह सर्जरी सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. रवि विष्णु प्रसाद के नेतृत्व में की गई।
77 वर्षीय बुजुर्ग की बचाई जान

यह एडवांस प्रोसीजर एक 77 वर्षीय बुजुर्ग मरीज पर किया गया, जो गंभीर ‘एओर्टिक स्टेनोसिस’ (हार्ट वाल्व का सिकुड़ना) से पीड़ित थे। मरीज को सीओपीडी (COPD) और प्रोस्टेट जैसी कई अन्य गंभीर बीमारियां भी थीं, जिसके कारण उनकी पारंपरिक ओपन-हार्ट सर्जरी करना अत्यधिक जोखिम भरा था। इसके अलावा, उनके दिल की पंपिंग क्षमता भी घटकर केवल 30% ही रह गई थी।

जानेंक्या है TAVI तकनीक

TAVI एक मिनिमली इनवेसिव तकनीक है, जिसमें सीना चीरे बिना कमर (जांघ) की धमनी के जरिए कैथेटर की मदद से नया वाल्व दिल तक पहुंचाया जाता है। आईजीआईएमएस में मरीज के क्षतिग्रस्त वाल्व की जगह 24.5 mm का ‘MyVal ट्रांसकैथेटर हार्ट वाल्व’ सफलतापूर्वक स्थापित किया गया, जिसके तुरंत बाद मरीज का ब्लड फ्लो सामान्य हो गया। यह तकनीक उन बुजुर्गों और अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए संजीवनी है, जो ओपन-हार्ट सर्जरी का खतरा नहीं उठा सकते।

मरीजों को मिलेगा बड़ा फायदा

डॉ. रवि विष्णु प्रसाद ने इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, “आईजीआईएमएस में TAVI प्रक्रिया का सफल होना बिहार में एडवांस कार्डियक केयर के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। अब राज्य के लोगों को जटिल वाल्वुलर हार्ट डिजीज के इलाज के लिए मेट्रो शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।”

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