October 16, 2021

आज मनाया जाता है हिंदी पत्रकारिता दिवस, जाने कहाँ से हुई थी शुरुवात

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लोकतंत्र में चौथा स्तंभ यानी मीडिया का महत्वपूर्ण स्थान हैं । आज हिंदी पत्रकारिता दिवस है  30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रुप में बनाया जाता है । समाचार पत्र समाज के लिए दर्पण की तरह कार्य करता है । पत्रकार के पास अपार शक्ति और जिम्मेदारी होती है । पत्रकार समाज के लिए बहुत जरूरी है ख़ासकर के लोकतंत्र में ।

आइए जाने हिंदी पत्रकारीता की शुरुवात कब कहाँ और कैसे की गयी

हिंदी पत्रकारिता की शुरुवात 30 मई 1826 से हुई । दरअसल, इस दिन हिंदी भाषा में  समाचार पत्र प्रकाशित हुआ था । जिसका नाम  उदन्त मार्तण्ड’ था । पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने इसे कलकत्ता से एक साप्ताहिक समाचार पत्र के तौर पर शुरू किया था। इसके प्रकाशक और संपादक भी वे खुद थे। कलकत्ता में अंग्रेजी भाषा और उसके बाद अन्य उर्दू, फारसी अन्य की भाषा का प्रभाव अधिक था । जिस कारण अन्य भाषा में समाचार पत्र अधिक प्रकाशित हुआ करते थे । लेकिन हिंदी पत्र ज्यादा नहीं चल सका । प० जुगल किशोर ने सरकार से लोगो तक समाचार पत्र पहुँचाने के लिए रियायत मांगी लेकिन ब्रिटिश सरकार इसके खिलाफ थी आखिरकार 4 दिसम्बर 1827 को इसका प्रकाशन बंद कर दिया गया । स्वतंत्रता के लिए उन्होंने कठिन संघर्ष किया।

राजा राममोहन की प्रमुख रचनायें

राजा राममोहन राय को स्वतंत्र पत्रकारिता का जनक भी कहा गया है। प्रेस की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने कठिन संघर्ष किया। राजा राममोहन राय ने धार्मिक एवं सामाजिक विचारों के प्रसार के लिए 20 अगस्त सन् 1828 ईसवीं में कलकत्ता में ब्रह्म समाज की स्थापना की। राजा राममोहन राय की शबद कौमुदी, मिरातुल अख़बार, बंगदूत, मनजारा-तुल-अद्ययन, द गार्डन टू पीस एण्ड हैपीनेस आदि प्रमुख रचनाएं हैं ।

1921 के बाद साहित्यक्षेत्र में जो पत्र आए उनमें प्रमुख हैं-

देश की आज़ादी के समय से लेकर अभी तक हिंदी पत्रकारिता का राष्ट्र की सेवा में बहुमूल्य योगदान रहा है । इसका श्रेय निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारों की कलम को जाता है।स्वार्थ , माधुरी, मर्यादा, चाँद मनोरमा, समालोचक (, चित्रपट  कल्याण, सुधा  विशालभारत, त्यागभूमि , हंस, गंगा, विश्वमित्र , रूपाभ  साहित्य संदेश, कमला , मधुकर  जीवनसाहित्य, विश्वभारती संगम , कुमार, नया साहित्य , पारिजात, हिमालय आदि प्रमुख पत्र है जो1921 के बाद साहित्यक्षेत्र में आएं ।

सकारात्मक विचारों से ही पत्रकार समाज को नयी दिशा प्रदान कर सकते हैं

सकारात्मक विचारों से ही पत्रकार समाज को नयी दिशा प्रदान कर सकते हैं इसमें कोई दोहराई नहीं की वर्तमान समय में पत्रकारिता का रूप बदलता जा रहा है । प्रेस आज जितना स्वतंत्र और मुखर दिखता है, आजादी की जंग में यह उतनी ही बंदिशों और पाबंदियों से बँधा हुआ था। न तो उसमें मनोरंजन का रूप था और न ही कमाई का जरिया।  ये अखबार और पत्र-पत्रिकाएँ आजादी के जाँबाजों का एक हथियार और माध्यम थे, जो उन्हें लोगों और घटनाओं से जोड़े रखता था। आजादी की लड़ाई का कोई भी ऐसा योद्धा नहीं था, जिसने अखबारों के जरिए अपनी बात कहने का प्रयास न किया हो।

पत्रकारिता के मूल्य

पत्रकारिता में लोकतंत्र ने यह महत्वपूर्ण स्थान अपने आप हासिल नहीं किया है बल्कि सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति पत्रकारिता के दायित्वों के महत्व को देखते हुए समाज ने ही यह दर्जा दिया है। लोकतंत्र तभी सशक्त होगा जब पत्रकारिता सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति अपनी सार्थक भूमिका निर्वाह करें। पत्रकारिता का उद्देश्य ही यह होना चाहिए कि वह प्रशासन और समाज के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी की भूमिका निभाये ।