October 22, 2021

उत्तराखण्ड के लोकगायक पप्पू कार्की का आज है जन्मदिन

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उत्तराखंड के अमर लोकगायक, कुमाऊँनी गानों की आन बान शान कहे जाने वाले  लोकगायक पवेंद्र सिंह कार्की ऊर्फ पप्पू कार्की का आज जन्मदिन है,पप्पू कार्की का जन्म 30 जून 1984 को  पिथौरागढ़ के सेलावन गाँव में हुआ था । उनके पिता का नाम स्व० कृष्णा सिंह कार्की था और माता का नाम कमला देवी  है । उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पिथौरागढ़ से ही संपन्न की, और स्नातकिय शिक्षा थल पिथौरागढ़ से संपन्न की थी । उनकी पत्नी का नाम कविता कार्की और उनका एक बेटा है जिसका नाम दक्ष है । उनका बेटा भी गानों में विशेष दिलचस्पी रखता है ।

डीडीहाट की जमना छोरी से मिली अलग पहचान

पप्पू कार्की ने बहुत कम उम्र से गाना शुरू कर दिया था | सिर्फ 5 साल की नन्ही उम्र में ही वेपारम्परिक न्योली लोकगीत को गाने लगे थे ।पप्पू कार्की जी के द्वारा गाया गया  पहला गाना फ़ौज की नौकरी” नामक एल्बम का था | उसके बाद एक अन्य एल्बम हरियो रुमाला” के लिए भी वर्ष 2002 में पप्पू कार्की जी ने गाने गाये | 2003 में पप्पू कार्की ने अपनी एक एल्बम लांच की जिसका नाम मेघा था लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वे 2003 में ही नौकरी की तलाश में दिल्ली चले गये । 2006 में उन्होंने दिल्ली में आयोजित हुए उत्तराखंड आइडल में भाग लिया जिसमे वे फर्स्ट रनर अप रहे। उसके बाद वर्ष 2010 में रामा कैसेटस की  एल्बम रिलीज़ की गयी इसी एल्बम का एक गाना डीडीहाट की जमना छोरी मशहूर हो गया और इसी गाने से उन्हें एक नयी पहचान मिली ।

दर्शकों का खूब प्यार मिला

इसके बाद वह अपनी लोकगायकी के लिए दिन प्रतिदिन मशहूर होते चले गए । इसके बाद वर्ष 2015 में पप्पू कार्की द्वारा एक “मोहनी” नामक एक और एल्बम रिलीज़ की गयी | वर्ष 2017 में पप्पू कार्की ने हल्द्वानी में अपना पी के ऐंटरप्राइजेज नामक स्टूडियो खोल लिया | इसी स्टूडियो के ज़रिये वे उत्तराखंड की उभरती हुई प्रतिभाओ को गायन का मौका दिया करते थे और साथ ही उन्हें प्रशिक्षण भी दिया करते थे | वर्ष 2018 में फरवरी के महीने में उन्होंने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के लिए “चेली बचाया, चेली पढ़ाया” लोकगीत की रचना की | उन्होंने हमेशा यही कोशिश की, कि पहाड़ के लोग अपनी पारम्परिक लोकगीत को न भुले । इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पारंपरिक गीतों को नए अंदाज में दर्शकों के समक्ष पेश किया, और सभी लोगों द्वारा उनके गीतों को खूब  प्यार मिला ।

34 वर्ष की अल्पायु में हुआ निधन

केवल 34 वर्ष की अल्पायु में ही 9 जून 2018 को पप्पू कार्की का एक सड़क दुर्घटना में  आकस्मिक निधन हो गया | इस खबर को सुनते ही पूरे कुमाऊँ में शोक की लहर दौड़ पड़ी और  सभी संगीत प्रेमीयों मेें मायूसी छा गई । उनके द्वारा अपने जीवनकाल में कुमाऊंनी लोकसंस्कृति को बचाये रखने के प्रयास को कभी भुलाया नहीं जा सकता | उनके मधुर गीतों ने सबका दिल जीत लिया । आज भले ही वह हमारे बीच मौजूद नहीं हैं पर उनके द्वारा किये गए  सराहनीय कार्यों ने उन्हें सदैव के लिए अमर बना दिया ।