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23 जनवरी: आज माघ गुप्त नवरात्रि का पांचवां दिन, मां छिन्नमस्ता देवी की पूजा का विधान, जानें महत्व

आज 23 जनवरी 2026 है। आज माघ नवरात्रि का पांचवां दिन है। गुप्त नवरात्रि का आज पांचवां दिन है। पांचवें दिन मां छिन्नमस्ता देवी की उपासना की जाती है।

गुप्त नवरात्रि का महत्व

माघ व आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन नौ दिनों में तंत्र साधना करने वाले लोग माँ भगवती के दस महाविद्याओं की पूजा को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होंगी, फल उतना ही सुखदायी होगा। मान्यता है कि भक्त  आषाढ़ नवरात्रि में गुप्त रूप से आदि शक्ति देवी दुर्गा की उपासना करते हैं उनके जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता है ।

जानें पौराणिक कथा

माता छिन्नमस्ता की उत्पत्ति से जुड़ी एक पौराणिक कथा प्रसिद्ध है। कथा के अनुसार एक दिन माता छिन्नमस्ता अपनी दो सखियों के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान कर रही थीं। तभी माता की सखियों ने कहा कि हमें बहुत ज्यादा भूख लगी है और माता से कुछ खाने को मांगने लगी तो माता ने उन्हें कुछ देर प्रतीक्षा करने को कहा लेकिन भूख से व्याकुल सखियां बार-बार माता से कुछ खाने के लिए मांगती रही। माता से अपनी सखियों की भूख देखी नहीं गई और मा भवानी ने अपना सिर काट दिया। उनके सिर से खून की तीन धाराएं निकलीं। इनमें से दो धाराओं को उनकी दोनों सखियों ने अपनी प्यास बुझाई और तीसरी धारा से स्वयं माता की प्यास बुझी। माना जाता है कि तब से वह माता छिन्नमस्ता के नाम से संसार में जानी जाती है। देवी दुष्टों के लिए संहार करने और भक्तों के लिए दया भाव रखती हैं, इसलिए देवी की आराधना हमेशा सच्चे और निर्मल मन से करनी चाहिए।

सुबह-शाम करें सप्तशती का पाठ

गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में भी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि में नौ दिन के लिए कलश स्थापना की जा सकती है। यदि कलश की स्थापना की है तो सुबह-शाम मंत्र जाप, चालीसा या सप्तशती का पाठ करें। दोनों ही समय आरती करना भी अच्छा होगा। मां को दोनों समय भोग भी लगाएं। माघ गुप्त नवरात्रि में साधकों को नियमों के साथ कुछ विशेष मंत्रों का भी ध्यान रखना चाहिए, जिनका उच्चारण करने से मां भगवती प्रसन्न हो जाती है और भक्तों को सुख एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। ऐसे में साधकों को माघ नवरात्रि का शुभारंभ दुर्गा चालीसा के पाठ से अवश्य करना चाहिए।

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