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24 जनवरी: आज माघ गुप्त नवरात्रि का छठा दिन, मां त्रिपुर भैरवी देवी की पूजा का विधान, जानें महत्व

आज 24 जनवरी 2026 है। आज माघ नवरात्रि का छठा दिन है। गुप्त नवरात्रि का आज छठा दिन है। छठे दिन मां त्रिपुर भैरवी देवी की उपासना की जाती है।

गुप्त नवरात्रि का महत्व

माघ व आषाढ़ नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि इसलिए कहा जाता है क्योंकि इन नौ दिनों में तंत्र साधना करने वाले लोग माँ भगवती के दस महाविद्याओं की पूजा को सिद्ध करने के लिए उपासना करते हैं। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं। कहा जाता है कि गुप्त नवरात्रि में पूजा और मनोकामना जितनी ज्यादा गोपनीय होंगी, फल उतना ही सुखदायी होगा। मान्यता है कि भक्त  आषाढ़ नवरात्रि में गुप्त रूप से आदि शक्ति देवी दुर्गा की उपासना करते हैं उनके जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता है ।

जानें पौराणिक कथा

देवी त्रिपुर भैरवी को बंदीछोड़ माता भी कहा गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि में मां त्रिपुर भैरवी की पूजा करने से सभी प्रकार के कानूनी मामलों और कारावास आदि से मुक्ति मिलती है। दुर्गा सप्तशती के अनुसार त्रिपुर भैरवी के उग्र स्वरूप की कांति हजारों उगते सूर्य के समान है। धार्मिक कथाओं में इस बात का वर्णन है कि माता त्रिपुर भैरवी की उत्पत्ति महाकाली के छाया विग्रह से ही हुई है। देवी भागवत के अनुसार छठी महाविद्या त्रिपुर भैरवी हैं। मां त्रिपुर भैरवी के विभिन्न प्रकार के भेद माने गए हैं। सिद्ध भैरवी, चैतन्य भैरवी, भुवनेश्वर भैरवी, संपदाप्रद भैरवी, कमलेश्वरी भैरवी, कौलेश्वर भैरवी, नित्या भैरवी, रूद्र भैरवी, भ्रद भैरवी आदि रूप माने जाते हैं।

सुबह-शाम करें सप्तशती का पाठ

गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में भी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि में नौ दिन के लिए कलश स्थापना की जा सकती है। यदि कलश की स्थापना की है तो सुबह-शाम मंत्र जाप, चालीसा या सप्तशती का पाठ करें। दोनों ही समय आरती करना भी अच्छा होगा। मां को दोनों समय भोग भी लगाएं। माघ गुप्त नवरात्रि में साधकों को नियमों के साथ कुछ विशेष मंत्रों का भी ध्यान रखना चाहिए, जिनका उच्चारण करने से मां भगवती प्रसन्न हो जाती है और भक्तों को सुख एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं। ऐसे में साधकों को माघ नवरात्रि का शुभारंभ दुर्गा चालीसा के पाठ से अवश्य करना चाहिए।

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