January 24, 2022

आज विश्वभर में मनाया जाता है सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग दिवस, जानें, कबसे हुई शुरुवात

 2,076 total views,  2 views today

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (एमएसएमई) उद्योग विश्व के कई विकसित देशों की अर्थव्यवस्था को सुदृ़ढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करने में एमएसएमई का भरपूर सहयोग रहा है। जी हां, इनमें से कई एमएसएमई उद्यमियों ने तो न सिर्फ देश में बल्कि पूरी दुनिया में नाम कमाया है। महज इतना ही नहीं कोरोना महामारी के विकट संकट में तो एमएसएमई ने देश की रीढ़ बनकर महत्वपूर्ण कार्य किया है। आज इन्हीं एमएसएमई को लेकर एक बड़ा दिन है। दरअसल, आज सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग दिवस यानि एमएसएमई दिवस है।

27 जून को वैश्विक स्तर पर मनाया जाता सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग दिवस

, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग दिवस (एमएसएमई) प्रत्येक वर्ष 27 जून को वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है। इसको मनाए जाने के पीछे का मकसद है- सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने और सभी के लिए नवोन्मेषण एवं स्थायी कार्यों को बढ़ावा देने में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम आकार के उद्यमों को बढ़ावा देना। एमएसएमई श्रमिकों के कमजोर क्षेत्र जैसे महिलाओं, युवाओं और गरीब परिवारों के लोगों के बड़े हिस्से को रोजगार देता है। ग्रामीण क्षेत्रों में एमएसएमई कभी-कभी रोजगार का एकमात्र स्रोत ही होता है।

यूएनजीए के 193 सदस्‍यों ने बिना मतदान के दी इसे स्वीकृति

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा संकल्प ए/आरईएस/71/279 के माध्यम से लघु व्यवसाय पहुंच में सुधार की आवश्यकता को पहचानने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग दिवस की स्थापना की गई। यह संकल्प अर्जेंटीना के प्रतिनिधिमंडल द्वारा पेश किया गया था तथा 54 सदस्य राज्यों द्वारा इसे सह-प्रायोजित भी किया गया था और इसे अप्रैल 2017 में 193 सदस्यीय यूएनजीए द्वारा मतदान के बिना अपनाया गया था।

एमएसएमई में सरकार करती है अपने स्तर पर ये काम

आज सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग की मदद से एमएसएमई में सामाजिक-आर्थिक विकास और रोजगार के अवसर को बढ़ावा देने का कार्य संपूर्ण भारत में तेजी से हो रहा है। ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देकर विभाग ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सामान्य ग्रामीण लोगों और विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को सशक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग एमएसएमई को ऋण, प्रौद्योगिकी तथा स्थानीय एवं वैश्विक बाजार तक की पहुंच प्रदान करने का कार्य कर रहा है। एमएसएमई को न्यूनतम साझा सुविधा प्रदान करने के लिए विभाग क्लस्टरों का विकास भी करता है। इसके साथ ही निरंतर स्व-रोजगार योजनाओं के माध्यम से विभाग युवाओं को प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि वह अपने गृह शहर एवं गांव में अपने उद्यम स्थापित कर सके।

एमएसएमई का जीडीपी में है 30 फीसदी से अधिक का योगदान

भारत के संदर्भ में यदि इस सेक्टर को देखें तो देश की अर्थव्यवस्था, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसका योगदान 30 फीसदी से ज्यादा है। सच है कि कोविड महामारी का पूरे एमएसएमई क्षेत्र में गंभीर प्रभाव पड़ा है, लेकिन इसके बाद भी यह जीडीपी के साथ-साथ रोजगार भी पैदा करते रहने में सफल रहा है। कहना होगा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने भारतीय अर्थव्यवस्था में हमेशा अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, क्योंकि इस सेक्टर में सबसे अधिक विकेंद्रीकृत रोजगार पैदा होते हैं। लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि आंकड़ों के मुताबिक जर्मनी और चीन की जीडीपी में एमएसएमई की भागीदारी क्रमशः 55 और 60 प्रतिशत है, जो यह बताने के लिए काफी है कि भारत को इस क्षेत्र में अभी लंबा सफर तय करना है ।