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उत्तराखंड: यहां मिले ‘हथियारों के जखीरे’ से उठा रहस्य का पर्दा, ASI की जांच में हुआ यह खुलासा

उत्तराखंड: उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में करीब 9 वर्ष पूर्व सड़क निर्माण के दौरान हथियारों के भंडार मिले हैं। जिसके बाद पुरातत्वविदों और इतिहासकारों के बीच नई हलचल पैदा कर दी है।

रिपोर्ट आई सामने

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की विज्ञान शाखा ने लंबी जांच के बाद इन हथियारों की रासायनिक संरचना पर अपनी विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट से संकेत मिले हैं कि ये महज औजार नहीं, बल्कि किसी प्राचीन सैन्य भंडार या युद्ध तैयारी केंद्र का हिस्सा रहें थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2015 में टिहरी के पिपोला ढुंग क्षेत्र में खुदाई के दौरान कुल 94 हथियार और औजार मिले थे। इन अवशेषों की पहचान को लेकर देहरादून निवासी राजू गुसाईं द्वारा लगाई गई आरटीआइ (RTI) के जवाब में एएसआइ ने तीन पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है। एएसआइ की विज्ञान शाखा ने हथियारों को नुकसान पहुँचाए बिना ‘हैंडहेल्ड एक्सआरएफ’ (एक्सरे फ्लूरोसाइंस) तकनीक से इनकी जांच की है।

यह हथियार शामिल

कुछ हथियारों में तांबा और जिंक (जस्ता) की बड़ी मात्रा मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थान प्राचीन काल में कोई सैनिक भंडार (Armoury) रहा होगा। साथ ही युद्ध तैयारी केंद्र रहा होगा या फिर किसी प्राचीन जनजाति का सामूहिक संग्रह केंद्र रहा होगा।‌ इनहथियारों की लंबाई 7 से 26 सेंटीमीटर के बीच है, जिनमें तलवारें, भाले और हार्पून, चाकू, लोहे की चेन और छल्लेदार वस्तुएं, तलवार की मूठ (हैंडल), क्रॉसगार्ड और क्विलान ब्लॉक के हिस्से है।

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