उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड में एशियन वाटरबर्ड सेंसस (एडब्ल्यूसी) 2026 का आयोजन किया गया था। जिसका बीते रविवार को समापन हो गया है। एशियन वाटरबर्ड सेंसस 2026 का आयोजन उत्तराखंड वन विभाग, उत्तराखंड राज्य जैव विविधता बोर्ड और ई-बर्ड इंडिया के सहयोग से किया गया।
छह प्रजातियां संकटग्रस्त अथवा निकट संकटग्रस्त श्रेणी की मिली
इस सेंसस के दौरान असन वेटलैंड क्षेत्र में कुल 126 पक्षी प्रजातियाें के कुल संख्या 5806 दर्ज की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सेंसस में पक्षी प्रेमियों, छात्रों, स्वयंसेवकों और वन विभाग के कार्मिकों ने सर्दियों के मौसम में प्रवासी और स्थानीय जलीय पक्षियों की निगरानी की। असन वेटलैंड क्षेत्र में कुल 126 पक्षी प्रजातियाें के कुल संख्या 5806 दर्ज की गई। इनमें छह प्रजातियां संकटग्रस्त अथवा निकट संकटग्रस्त श्रेणी की पाई गईं। इनमें स्टेप ईगल, इजिप्शियन वल्चर और पैलास फिश ईगल को संकटग्रस्त श्रेणी में, कॉमन पोचार्ड को संवेदनशील श्रेणी में तथा फेरुगिनस डक, एशियन वूली नेक्ड स्टॉर्क और रिवर लैपविंग को निकट संकटग्रस्त श्रेणी में दर्ज किया गया। सेंसस की प्रमुख उपलब्धि रुडी शेलडक की सर्वाधिक 983 संख्या का रिकॉर्ड रही, जबकि बार हेडेड गूज, ग्रेलैग गूज, कॉमन पोचार्ड और फेरुगिनस डक की उपस्थिति दर्ज की गई।