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उत्तराखंड: चारधाम यात्रा 2026: केदारनाथ हेली सेवा में होगा यह बदलाव, सुरक्षा के लिए लगेंगे सेलोमीटर और कैमरे

​उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड में स्थित विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अगले माह से शुरू होने वाली है। इसी बीच केदारनाथ धाम से जुड़ी खबर सामने आई है। सरकार इस वर्ष केदारनाथ धाम की यात्रा को और अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और तकनीक-युक्त बनाने के लिए बड़े कदम उठाने जा रही है।

होंगे यह बदलाव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले वर्ष की दुर्घटनाओं से सबक लेते हुए उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) अब हेलीपैडों और हेलीकॉप्टरों की डिजिटल निगरानी करेगा। इसके लिए आधुनिक सेलोमीटर (Ceilometer) और कैमरों का उपयोग किया जाएगा। इस साल निम्नलिखित तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं।
• ​सेलोमीटर की स्थापना: गुप्तकाशी, सिरसी और फाटा के 9 प्रमुख हेलीपैड पर सेलोमीटर लगाए जाएंगे। यह उपकरण बादलों की ऊंचाई और दृश्यता (Visibility) की सटीक जानकारी देगा, जिससे पायलट को उड़ान भरने या न भरने का सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
• ​इन-फ्लाइट कैमरे: हेलीकॉप्टरों के भीतर कैमरे लगाए जाएंगे ताकि उड़ान के दौरान की गतिविधियों की निगरानी की जा सके। यह दुर्घटना की स्थिति में कारणों के सटीक विश्लेषण में भी सहायक होंगे।
• ​चार्टर सेवाओं पर नजर: केदारनाथ शटल के साथ-साथ अन्य धामों के लिए चलने वाली चार्टर सेवाओं में भी कैमरे लगाने पर विचार चल रहा है।

ऑपरेटरों और पायलटों के लिए कड़े नियम

​यूकाडा ने इस बार सुरक्षा मानकों को और सख्त कर दिया है।
• ​अनुभवी पायलट: पायलट की अधिकतम आयु 60 वर्ष तय की गई है। साथ ही, उन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में कम से कम 100 घंटे की सिंगल पायलट फ्लाइंग का अनुभव होना अनिवार्य है।
• ​स्टैंड-बाय हेलीकॉप्टर: प्रत्येक ऑपरेटर के पास एक अतिरिक्त (Stand-by) हेलीकॉप्टर होना जरूरी है। यदि कोई कंपनी दो से तीन हेलीपैड से सेवाएं दे रही है, तो उनके बेड़े में कम से कम चार हेलीकॉप्टर होने चाहिए।
• ​सीमित उड़ानें: भीड़ और दबाव को नियंत्रित करने के लिए इस वर्ष भी हेली सेवाओं का संचालन सीमित और नियंत्रित संख्या में ही किया जाएगा।

कहीं यह बात

इस संबंध में आशीष चौहान, सीईओ, यूकाडा ने बताया कि “राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित और विश्वसनीय यात्रा उपलब्ध कराना है। डिजिटल निगरानी प्रणाली लागू होने से न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।”

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