उत्तराखंड: पहाड़ों की रानी मसूरी और उसके आसपास के इलाकों पर भूस्खलन का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यह जानकारी वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक विस्तृत भूगर्भीय अध्ययन में सामने आई है।
अध्ययन में सामने आई यह बात
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिसमें इस क्षेत्र का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा भूस्खलन की दृष्टि से ‘अत्यधिक और बहुत उच्च’ संवेदनशील जोन में आता है। कुल मिलाकर, अध्ययन किए गए क्षेत्र का 44 प्रतिशत हिस्सा किसी न किसी स्तर पर भूस्खलन के जोखिम का सामना कर रहा है। यह अध्ययन मसूरी के 84 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में उच्च-रिजोल्यूशन उपग्रह तस्वीरों और भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) की मदद से किया गया है। अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘अर्थ सिस्टम साइंस’ में प्रकाशित इस रिपोर्ट के अनुसार, 29 प्रतिशत क्षेत्र मध्यम जोखिम में है, जबकि 56 प्रतिशत हिस्सा कम या बहुत कम जोखिम वाली श्रेणी में आता है।
यह इलाके सबसे ज्यादा खतरे में
रिपोर्ट्स के मुताबिक वैज्ञानिकों के अनुसार मसूरी के कई मशहूर पर्यटन स्थल और घनी आबादी वाले क्षेत्र सबसे ज्यादा जोखिम वाले वर्ग में पाए गए हैं। इनमें जॉर्ज एवरेस्ट, कैम्प्टी फॉल, भट्टाघाट, लाइब्रेरी रोड, खट्टापानी, गलोगीधार और हाथीपांव जैसे प्रमुख इलाके शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि इन क्षेत्रों की चट्टानें अत्यधिक दरारयुक्त ‘क्रोल लाइमस्टोन’ से बनी हैं और यहाँ की ढलान 60 डिग्री से भी अधिक है। वैज्ञानिकों ने विभिन्न भूगर्भीय कारकों का संयुक्त विश्लेषण कर ‘लैंडस्लाइड ससेप्टिबिलिटी इंडेक्स’ (LSI) तैयार किया है, जिसके आधार पर पूरे क्षेत्र को पांच जोखिम श्रेणियों में विभाजित किया गया है।