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उत्तराखंड: एफडीए ने जारी किए जरूरी दिशा-निर्देश, उठाया बड़ा कदम, अब डाॅक्टर के पर्चे पर ही बच्चों को मिलेगी कफ सिरप

उत्तराखंड से जुड़ी खबर सामने आई है। उत्तराखंड के खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बच्चों में खांसी और जुकाम की दवाओं को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

जारी किए जरूरी निर्देश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिस पर एफडीए ने बच्चों में खांसी और जुकाम की दवाओं के सही और सुरक्षित उपयोग के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी सलाह के अनुरूप यह कदम उठाया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक एफडीए ने स्पष्ट किया है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों को खांसी और जुकाम की दवाएं नहीं दी जानी चाहिए। पांच साल से कम उम्र में ये दवाएं आमतौर पर सुरक्षित नहीं मानी जातीं। पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों में भी इन दवाओं का उपयोग केवल चिकित्सक की सावधानीपूर्वक जांच, उचित खुराक, न्यूनतम अवधि और सुरक्षित दवा संयोजन का पालन करते हुए किया जाना चाहिए।

नियमित सैंपलिंग भी अनिवार्य

इसके लिए सभी दवा विक्रेताओं और चिकित्सकों को निर्देश दिए हैं कि बिना पंजीकृत चिकित्सक की वैध पर्ची के कोई भी खांसी की दवा न बेची या वितरित की जाए। इसके अलावा, खांसी की सिरप की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित सैंपलिंग भी अनिवार्य होगी।

कफ सिरप के मामले

दरअसल हाल ही में राजस्थान के सीकर में पांच वर्षीय बच्चे की मौत कफ सिरप (डेक्सट्रोमेथारफन हाइड्रोब्रोमाइड) पीने के बाद हुई थी। साथ ही राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी बच्चों के बीमार होने के मामले सामने आए हैं, जिसके बाद राज्य का औषधि नियंत्रण विभाग भी सतर्क हो गया है।

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