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उत्तराखंड: केदारनाथ हादसे की अंतिम रिपोर्ट जारी, AAIB की सिफारिश, दुर्गम घाटी में उड़ान के लिए अनिवार्य हो 50 घंटे का पहाड़ी अनुभव

​उत्तराखंड: केदारनाथ घाटी में विमान दुर्घटनाओं की जांच करने वाली एजेंसी विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने जून 2025 में हुए दुखद हेलीकॉप्टर हादसे की अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी कर दी है।

अंतिम रिपोर्ट जारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हादसे में पायलट समेत सात लोगों की जान चली गई थी। अपनी जांच रिपोर्ट के आधार पर AAIB ने विमानन नियामक डीजीसीए (DGCA) से सिफारिश की है कि केदारनाथ जैसी दुर्गम और अत्यधिक ऊंचाई वाली घाटियों में एकल-पायलट के रूप में उड़ान भरने से पहले संबंधित पायलट के पास पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान का न्यूनतम अनुभव होना अनिवार्य किया जाना चाहिए।

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जानें क्या थीं हादसे की मुख्य वजहें

रिपोर्ट्स के मुताबिक AAIB की रिपोर्ट के अनुसार, 15 जून 2025 को आर्यन एविएशन का ‘बेल 407’ हेलीकॉप्टर (VT-BKA) श्री केदारनाथ से गुप्तकाशी के लिए रवाना हुआ था। जांच में दुर्घटना के मुख्य संभावित कारणों में ​दुर्गम और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में उड़ान का कम अनुभव होना, रास्ते में बादलों का अचानक बनना और उनका तेजी से करीब आना व‌ बादलों को देखकर समय रहते मार्ग बदलने या वापस लौटने के बजाय उसी मार्ग और ऊंचाई पर उड़ान जारी रखना। रिपोर्ट के मुताबिक, उड़ान से पहले या हादसे तक पायलट ने हेलीकॉप्टर में किसी भी तकनीकी खराबी या असामान्यता की कोई सूचना नहीं दी थी। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि हेलीकॉप्टर में किसी भी तरह की यांत्रिक या तकनीकी खराबी नहीं थी, क्योंकि उड़ान से पहले या दुर्घटना तक पायलट ने किसी असामान्यता की सूचना दर्ज नहीं कराई थी।

​AAIB की प्रमुख सुरक्षा सिफारिशें

एजेंसी ने सिफारिश की है कि डीजीसीए (DGCA) नियमों में संशोधन करे। केदारनाथ जैसी दुर्गम घाटी में किसी भी पायलट को पहली बार अकेले हेलीकॉप्टर उड़ाने की अनुमति देने से पहले, किसी अनुभवी पायलट के साथ कम से कम 50 घंटे की ‘डबल-पायलट’ उड़ान का अनुभव अनिवार्य किया जाना चाहिए। AAIB ने सुझाव दिया है कि केदारनाथ घाटी में हवाई यातायात का प्रबंधन करने वाले सीतापुर नियंत्रण केंद्र और विमान चालक दल के बीच रेडियो टेलीफोनी के जरिए होने वाले संवाद (बातचीत) की रिकॉर्डिंग की व्यवस्था की जाए, ताकि भविष्य में सुरक्षा जांच में मदद मिल सके।

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